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लिपियों के खत्म होने से अधिक्रांत क्षेत्रों में बढ़ रहा है असंतोष : प्रो. अग्निहोत्री

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लिपियों के खत्म होने से अधिक्रांत क्षेत्रों में बढ़ रहा है असंतोष : प्रो. अग्निहोत्री


धर्मशाला, 28 अक्टूबर (हि.स.)। भारत के उन क्षेत्रों पर जिन पर पाकिस्तान और चीन ने अवैध कब्जा कर रखा है, वहां लिपियों का प्रश्न यकायक महत्वपूर्ण हो उठा है। गिलगित-बाल्टिस्तान सहित अन्य क्षेत्रों में जो असंतोष दिख रहा है, उसकी आर्थिक और राजनीतिक व्याख्याएं तो की जा रही हैं लेकिन लिपि के प्रश्न पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। यह विचार हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकरी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने बुधवार को केन्‍न्‍द्रीय विश्‍वविद्वालय धर्मशार्ला में एक सेमिनार में रखे। कश्मीर अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित ‘जम्मू-कश्मीर अधिमिलन सप्ताह 2026’ के तृतीय व्याख्यान में बतौर विशेषज्ञ वक्ता उन्होंने कहा कि किस प्रकार पाकिस्तान अपने आंतरिक विरोधाभास से निपटने हेतु चीन की राह पर चलते हुए इस क्षेत्र की पहचान को समाप्त कर रहा है और गिलगित-बाल्टिस्तान की मूल भाषाओं को वहां की मूल लिपि के स्थान पर अरबी लिपि में कर रहा है।

प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि मजहब के नाम पर किये गए सीमाओं के कृत्रिम विभाजन ने अप्राकृतिक लड़ाई को जन्म दिया। कृत्रिम विभाजन शत्रुता का भाव उत्पन्न कर देते हैं, जो लंबे समय तक चलता रहता है। इस अप्राकृतिक विभाजन के कारण पाकिस्तान आज भी पहचान के संकट के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का सशक्तिकरण ही पाकिस्तान में असंतोष पैदा करेगा और इस कृत्रिम विभाजन की अप्राकृतिक दीवार को तोड़ सकता है।

इससे पूर्व कार्यक्रम में स्वागत भाषण में कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. मलकीत सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर अधिमिलन सप्ताह पिछले छः वर्षों में अकादमिक विमर्श का एक बड़ा अवसर बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इस साप्ताहिक व्याख्यानमाला में जम्मू-कश्मीर से संबंधित सम-सामयिक विषयों पर गहन विमर्श किया जाता है और इसकी यात्रा निरंतर जारी है। कार्यक्रम में अधिष्ठाता समाज विज्ञान प्रो. कंवर चंद्रदीप सिंह सहित हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित रहे। देश के विभिन्न हिस्सों से विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया