ज्ञान, अनुशासन और जीवन-मूल्यों पर आधारित रही है भारतीय शिक्षा : प्रो. बंसल
धर्मशाला, 09 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय शिक्षण मंडल, हिमाचल प्रांत की ओर से अपने 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर वीरवार को “शिक्षा में भारतीयता” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धौलाधार परिसर में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल, विशिष्ट अतिथि कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार सांख्यान एवं बतौर मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय शिक्षा मंडल के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ उपस्थित रहे।
मंडल के प्रतिनिधि डॉ. ओम प्रकाश प्रजापति ने भारतीय शिक्षण मंडल के संक्षिप्त इतिहास एवं परिचय देते हुए भारत के शिक्षा व्यवस्था में इस संगठन के महत्व एवं उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल एक वैचारिक अधिष्ठान है, भारत की सांस्कृतिक, दार्शनिक व ऐतिहासिक धरोहर से प्ररित वैश्विक जीवन दृष्टि है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने अपने उद्बोधन में भारतीय शिक्षा के व्यापक परिप्रेक्ष्य को रेखांकित करते हुए कहा कि देश के विभिन्न राष्ट्रीय संगठनों में भारतीय शिक्षा मंडल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिसने भारतीय शिक्षा प्रणाली को केवल संस्थागत स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैचारिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से नई दिशा एवं दशा प्रदान की है।
उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षण मंडल ने शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ते हुए उसे अधिक सार्थक और जीवनोपयोगी बनाया है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भारत की शिक्षा व्यवस्था मुख्यतः रटने पर आधारित थी, जिसमें कौशल विकास, सृजनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया। किंतु वर्तमान समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस पारंपरिक ढांचे को तोड़ते हुए शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी और कौशल-आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला रही है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार सांख्यान ने शिक्षा में नैतिकता, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली का मूल उद्देश्य सेवा भाव और चरित्र निर्माण है। उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना को शिक्षा का मूल आधार बताते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की दृष्टि प्रदान करती है। उन्होंने भारतीय मूल्यों जैसे प्रकृति प्रेम, दया, करुणा, सेवा और सहिष्णुता को शिक्षा का अभिन्न अंग बताया।
वहीं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ (अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख, भारतीय शिक्षा मंडल) ने “शिक्षा में भारतीयता” विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भारतीय परंपरा, भाषा, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान की प्रासंगिकता को वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया। उन्होंने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

