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शारदा लिपि में कश्मीरी भाषा की पहली पत्रिका ’शारदालोक’ का विमोचन

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शारदा लिपि में कश्मीरी भाषा की पहली पत्रिका ’शारदालोक’ का विमोचन


धर्मशाला, 14 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण-संवर्द्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए सप्तसिंधु फाउंडेशन ने शारदा लिपि में कश्मीरी भाषा की पहली पत्रिका ’शारदालोक’ का प्रकाशन किया है। इस पत्रिका का लोकार्पण हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के देहरा स्थित सप्तसिंधु परिसर में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के उपाध्यक्ष एवं सप्तसिंधु फाउंडेशन के निदेशक प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री एवं विश्वविद्यालय के आम्बेडकर अध्ययन केन्द्र के सहायक आचार्य डॉ. किस्मत कुमार ने किया है।

कश्मीरी भाषा कई सदियों तक शारदा लिपि में लिखी जाती रही, लेकिन मजहबी आक्रमणों के बाद इस पर पर्सो-अरेबिक नस्तालिक लिपि थोप दी गई। कश्मीरी भाषा से उसकी मूल लिपि छीनने के कारण कश्मीर की मूल पहचान तो प्रभावित हुई ही, वहां का सांस्कृतिक सातत्य भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ। अरसे बाद शारदालोक के माध्यम से कश्मीरी भाषा को उसकी मूललिपि में लिखने के चलन को मजबूती प्रदान करने की कोशिश की गई है। इसी कारण, इस पत्रिका के प्रकाशन को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इस मौके पर सप्तसिंधु फाउंडेशन के निदेशक प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान-परम्परा को समृद्ध बनाने और उसे संरक्षित रखने में शारदा लिपि की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ’शारदालोक’ भारतीय ज्ञान परम्परा के अनछुए आयामों तक पहुंचने का साधन बनेगी, ऐसी आशा है।

वहीं कुलपति प्रो. सतप्रकाश बंसल ने कहा कि ’शारदालोक’ का प्रकाशन शारदा लिपि को जीवंत बनाए रखने की दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, यह भारतीय ज्ञान परम्परा को समग्रता से समझने की प्रक्रिया को गति देने की सभी संभावनाओं को अपने में समेटे हुए है।

उधर विश्वविद्यालय के आम्बेडकर अध्ययन केन्द्र के सहायक आचार्य डॉ. किस्मत कुमार ने कहा कि लिपियां भाषा और भाव दोनों को गढ़ती हैं। 'शारदालोक' निश्चित रूप से भारतीय भाषा और भाव को समृद्ध करने में सहायक होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया