एआई के दौर में मानवीय मूल्य और नैतिकता अति आवश्यक : प्रो. बंसल
धर्मशाला, 06 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा मंगलवार को प्रो. राज नेहरू, ओएसडी टू चीफ मिनिस्टर, हरियाणा तथा पूर्व कुलपति, विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी हरियाणा द्वारा लिखित पुस्तक “मन से परे : चेतना के गहन आयामों की खोज (मैं शिव हूँ: आत्मबोध, जागरण एवं आत्म-परिवर्तन)” का विमोचन किया। वहीं बाद में इसी विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सीयू के कुलपति प्रो.एसपी बंसल मुख्यातिथि रहे।
विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने कहा कि विश्वविद्यालयों का कार्य केवल विद्यार्थियों को मैनेजर अथवा उद्यमी बनाना नहीं है, बल्कि एक अच्छा और जिम्मेदार इंसान बनाना भी होना चाहिए। प्रो. बंसल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परम्परा को आगे ले जाने का जो ध्येय लिया है, यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा निति-2020 में निहित मूल्यों के अनुसार अपने पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास एवं व्यक्तित्व निर्माण के लिए भारतीय ज्ञान परम्परा के विषय सम्मिलित किये हैं। प्रो. बंसल ने बताया कि विद्यार्थियों में मानवीय गुणों के विकास हेतु इस पुस्तक को भी पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा।
कुलपति प्रो. बंसल ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से विकसित हो रही है, लेकिन मानवीय बुद्धिमत्ता, संवेदना, विवेक, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि तकनीक मानव जीवन को सुगम बना सकती है, लेकिन मानवता, संवेदनशीलता और सही-गलत का विवेक ही समाज को सही दिशा प्रदान करता है। इसलिए विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवीय गुणों का विकास भी करना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. राज नेहरू ने अपनी पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर पुस्तक के मूल विचारों एवं उसके विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आत्मबोध, चेतना, जागरण तथा आत्म-परिवर्तन को व्यक्ति के समग्र विकास से जोड़ते हुए कहा कि मनुष्य की वास्तविक यात्रा बाहरी उपलब्धियों से आगे बढ़कर अपने भीतर की चेतना को समझने की यात्रा है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

