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भगवान बुद्ध की शिक्षाएं भारतीय सनातन परंपरा से अलग नहीं : डॉ. बालमुकुंद पांडेय

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भगवान बुद्ध की शिक्षाएं भारतीय सनातन परंपरा से अलग नहीं : डॉ. बालमुकुंद पांडेय


धर्मशाला, 04 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में वीरवार को एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। धर्मशाला के धौलाधार परिसर में बौद्ध अध्ययन केंद्र, अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र तथा डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता” विषय पर आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने की।

व्याख्यान को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने बुद्ध और उनकी शिक्षाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं भारतीय सनातन परंपरा से अलग नहीं हैं, बल्कि उसी ज्ञानधारा का एक महत्वपूर्ण और जीवंत आयाम हैं। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने जिन मूल्यों और सिद्धांतों का प्रतिपादन किया, उनका आधार वेदों, उपनिषदों और भारतीय दार्शनिक परंपराओं में विद्यमान है।

उन्होंने कहा कि बुद्ध ने वही जीवन-मूल्य सरल, व्यावहारिक और लोकभाषा में प्रस्तुत किए, जिन्हें भारतीय मनीषा सदियों से प्रतिपादित करती रही है। उनके अनुसार बुद्ध का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना ढाई हजार वर्ष पूर्व था। मध्यम मार्ग की अवधारणा की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में संतुलन और विवेक अत्यंत आवश्यक हैं। वर्तमान समय में तनाव, असंतोष और संघर्ष का एक प्रमुख कारण अत्यधिक संग्रह और भौतिक आकांक्षाओं की वृद्धि है। यदि व्यक्ति बुद्ध द्वारा प्रतिपादित अपरिग्रह, संतुलित जीवन और आत्मानुशासन के सिद्धांतों को अपनाए, तो व्यक्तिगत, सामाजिक और वैश्विक स्तर की अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन और उसके समकालीन महत्व को समझने का आग्रह किया।

इससे पूर्व बौद्ध अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं केवल धार्मिक या आध्यात्मिक विमर्श तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आधुनिक समाज के समक्ष उपस्थित अनेक चुनौतियों के समाधान का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।

वर्तमान में बुद्ध की शिक्षाएं प्रासंगिक : कुलपति

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने बुद्ध की शिक्षाओं की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विस्तृत और गहन विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज का विश्व अभूतपूर्व तकनीकी प्रगति के दौर से गुजर रहा है, किंतु इसके साथ ही हिंसा, मानसिक तनाव, संघर्ष, पर्यावरणीय संकट और उपभोक्तावाद जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में बुद्ध का करुणा, अहिंसा, संयम और मध्यम मार्ग का संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

प्रो. बंसल ने विद्यार्थियों को बुद्ध के जीवन और दर्शन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि समाज बुद्ध के सिद्धांतों को व्यवहार में अपनाए, तो अनेक सामाजिक और वैश्विक समस्याओं का समाधान संभव है।

उन्होंने धर्मशाला को बुद्ध की शिक्षाओं की जीवंत राजधानी बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र बौद्ध संस्कृति और दर्शन का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस संदर्भ में उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश में निकट भविष्य में बुद्ध दर्शन और समकालीन चिंतन पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की संभावना भी व्यक्त की। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं लगभग 100 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया