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डॉ. आम्बेडकर की बौद्ध दीक्षा रही है निरंतरता की यात्रा : प्रो. अग्निहोत्री

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डॉ. आम्बेडकर की बौद्ध दीक्षा रही है निरंतरता की यात्रा : प्रो. अग्निहोत्री


धर्मशाला, 14 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति आकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री ने कहा कि डॉ. आम्बेडकर की बौद्ध दीक्षा को सामान्यतः मतांतरण के तौर पर परिभाषित कर दिया जाता है, जबकि उनकी यह यात्रा निरंतरता की है। अन्य पंथों को छोड़कर बौद्ध मत की शरण में जाने का चुनाव ही यह बताता है कि वह भारतीयता की परिधि में रहकर की अपने निर्णय लेते थे। प्रो. अग्निहोत्री ने यह विचार बुधवार को हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के आम्बेडकर अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित आम्बेडकर संवादमाला के समापन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता रखे। ’डॉ भीमराव रामजी आम्बेडकर के दृष्टिकोण में बुद्ध या कार्ल मार्क्स’ विषय पर आयोजित संवादमाला में कई गणमान्यों ने भाग लिया।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध आंतरिक बदलाव को प्राथमिकता देते है, जबकि कार्ल मार्क्स बाहरी हिंसा के जरिए बाहरी बदलाव को। डॉ. आम्बेडकर ने भगवान बुद्ध के शरण में जाकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से बता दी थी । उन्होंने कहा कि डॉ. आम्बेडकर ने निंदा-प्रशंसा से परे हट कर भारत के लिए जो सही था वो किया। उन्होंने अभारतीय मज़हब में मतांतरण के विकल्प को इसी दृष्टि से नकारा था कि उससे आने वाली पीढ़ियों की भारत के प्रति श्रद्धा समाप्त हो जाएगी।

वहीं बतौर मुख्य अतिथि केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भी विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध को सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं से जोड़ना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार को सही नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत बहुत कम समय में आम्बेडकर संवादमाला ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और यह आशा जताई की वर्तमान भारतीय विमर्श को सकारात्मक दिशा देने में यह संवादमाला एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप साबित होगी।

कार्यक्रम के दौरान संवादमाला में वर्षभर हुए व्याख्यानों और संवाद को समेटने वाली ‘संवादमाला सारांशिका’ का लोकार्पण भी हुआ।

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के आम्बेडकर अध्ययन केंद्र में सहायक आचार्य डॉ. किस्मत कुमार ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता का इस संवादमाला में भाग लेने पर आभार जताया। डॉ. किस्मत कुमार की पुस्तक ‘बुद्ध की शरण में डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर’ का लोकार्पण भी हुआ। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ. किस्मत कुमार ने कहा कि जिन लोगों ने पुस्तक को लिखने के लिए निरंतर प्रेरित किया उनके हाथों से ही इसका लोकार्पण होना मेरे लिए आशीर्वाद जैसा है। उन्होंने कहा कि पुस्तक ने डॉ. आम्बेडकर को समझने की तथ्यात्मक आधारभूमि तैयार करने का प्रयास किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया