हिमाचल के स्कूलों में अब 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड शुरू
धर्मशाला, 20 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव की नींव रखी है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को मापने के लिए अब केवल अंकों पर निर्भर रहने के बजाय उनके कौशल, व्यवहार और मानसिक विकास का आंकलन होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (एचपीसी) के जरिए किया जाएगा। सोमवार से प्रदेश के दो प्रमुख जिलों शिमला और कांगड़ामें इसका पायलट प्रोजेक्ट आरंभ कर दिया गया है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि यह प्रगति पत्रक केंद्र सरकार की संस्था परख और एनसीईआरटी, नई दिल्ली के विशेष सहयोग से तैयार किया गया है। वर्तमान में इसे सेकेंडरी स्टेज यानी कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों के लिए विकसित किया गया है। यह कार्ड पूरी तरह से डिजिटल प्रारूप में होगा, जिससे न केवल डेटा प्रबंधन आसान होगा, बल्कि यह अधिक पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित भी बनेगा।
पहले चरण में शिमला और कांगड़ा के 10 स्कूल चयनित
पायलट प्रोजेक्ट के तहत बोर्ड ने रणनीतिक रूप से शिमला और कांगड़ा जिलों का चयन किया है। इन जिलों के कुल 10 विद्यालयों में इसे लागू किया गया है, जिनमें राजकीय एवं निजी विद्यालय दोनों क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता जांची जाएगी। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर फीडबैक लिया जाएगा।
क्या है एचपीसी और कैसे बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर
पारंपरिक रिपोर्ट कार्ड में जहां केवल विषयों के अंक दर्ज होते थे, वहीं एचपीसी विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व का दर्पण होगा। इस परियोजना के माध्यम से हमारा उद्देश्य हिमाचल की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाना है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश के सभी स्कूलों में लागू करने की योजना है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

