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हिमालयी क्षेत्रों को आपदा मुक्त टिकाऊ विकास की जरूरत : कुलभूषण उपमन्यु

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धर्मशाला, 31 मार्च (हि.स.)। हिमालयी क्षेत्रों को आपदा मुक्त टिकाऊ विकास की जरूरत है। यदि हिमालयी क्षेत्रों में तबाही वाले विकास का क्रम जारी रहा तो यहां जोशीमठ जैसे हालात पैदा होने में देर नहीं लगेगी। हिमालय क्षेत्रों में ऐसा होता है तो उसका असर पूरे देश में नजर आएगा। यह बात हिमालयन नीति अभियान के अध्यक्ष कुलभूषण उपमन्यु ने रविवार को धर्मशाला में प्रेसवार्ता में कही।

गौरतलब है कि पीपल फॉर हिमालय अभियान, हिमालय क्षेत्र के प्रगतिशील समूहों, नागरिक सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं की ओर से शुरू किया गया।

उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्रों में विकास के मॉडल को लेकर जमीनी स्तर पर प्लान बनाकर कार्य करना चाहिए। पिछले कुछ समय से हम लगातार विनाश की तरफ बढ़ रहे हैं, जिसमें प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल रही हैं। इसके चलते पालमपुर में 60 संगठनों ने एकत्रित होकर एक हिमालयन संरक्षण की डिमांड ड्राफ्ट बनाया है। जिसे राजनीतिक दलों को देकर लोकसभा चुनावों में अपने घोषणा पत्र में शामिल करने का आग्रह किया जाएगा। गलत तरीके से हो रहे विकास आपदाओं को लगातार बढ़ा रहे हैं, ऐसे में ये आपदाएं प्राकृतिक की बजाय मानवनिर्मित ही कही जा सकती हैं। विकास तो हर क्षेत्र में चाहिए, लेकिन विनाश का कारण बन जाए, ऐसे विकास की जरूरत नहीं है। ग्लेशियर को बनाये रखने से ही लगातार पानी मिलता रहेगा, अन्यथा बारिश आधारित पानी पर हम सब निर्भर हो जाएंगे। इस अवसर पर बिमला विश्वकर्मा, सुमित, दिनेश व अन्य मौजूद रहे।

पहाड़ की कैरिंग कैपेसिटी के लिहाज से चलना होगा : गुमान सिंह

पीपल फॉर हिमालय अभियान के पदाधिकारी गुमान सिंह ने कहा कि हिमालयन क्षेत्र के विकास को लेकर गलत नीति के तहत कार्य हो रहा है। पहाड़ और पहाड़ियों की समस्याएं एक जैसी है, आजीविका-रोजगार का भी संकट है। अब पहाड़ से पलायन भी हो रहा है, जबकि बाहर की आबादी को बसाने को लेकर षड्यंत्र हो रहा है। पहाड़ की कैरिंग कैपासिटी है, उसके तहत चलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाए कि कश्मीर, मणिपुर व अन्य पहाड़ी राज्यों में भी स्थिति ठीक नहीं है। केंद्र सरकार को सुरक्षा, पर्यावरण, रोजगार सहित अन्य बंदोबस्त करना होगा। आने वाले समय में पानी का संकट आने वाला है, जबकि अब छोटे-छोटे नालों में भी हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं। ऐसे में सोलर एनर्जी की तरफ जाकर संरक्षित करना होगा।

जलवायु परिवर्तन खतरे की निशानी : सौम्या

अभियान के पदाधिकारी सौम्या दत्ता ने कहा कि जलवायु में बड़ा परिवर्तन हुआ है, जोकि बढ़े खतरे की निशानी है। सरकार की ओर से भी हिमालयन रीजन के संरक्षण को लेकर पड़ोसी पहाड़ी देशों से मिलकर नीति बनाकर कार्य करना होगा। भारत सरकार की ओर से भी सन्सटेबल डवलपमेंट इन हिमालय को लेकर प्लान बनाया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य नहीं हो पा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार/सतेंद्र

/सुनील