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नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर होगी कार्रवाई, कब्जे भी हटेंगे : उपायुक्त

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नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर होगी कार्रवाई, कब्जे भी हटेंगे : उपायुक्त


धर्मशाला, 31 अगस्त (हि.स.)। जिला कांगड़ा में नशे की रोकथाम और नशा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने बहुआयामी रणनीति के तहत कार्रवाई तेज करने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में सोमवार को एनआईसी सभागार धर्मशाला में राष्ट्रीय नार्को समन्वय पोर्टल (एनकाॅर्ड) की जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त हेमराज बैरवा ने की।

बैठक में नशे की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण, नशा प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, युवाओं को नशे से दूर रखने, नशा मुक्ति एवं पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में नशा तस्करों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पीआईटी-एनडीपीएस के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ-साथ नशे के अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि नशा तस्करों द्वारा सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के मामलों में कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए तथा अवैध निर्माणों को नियमानुसार हटाया जाए। सभी एसडीएम को पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

उपायुक्त ने नशा प्रभावित क्षेत्रों में गठित नशा निवारण समितियों को सक्रिय करने तथा चिन्हित हाॅटस्पाॅट क्षेत्रों में निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने और नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

उपायुक्त ने जेलों में बंद नशे से संबंधित आरोपियों की नियमित काउंसलिंग, उपचार और निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

उपायुक्त ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिए कि स्कूल परिसर अथवा उसके आसपास नशे से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी मिलने पर इसकी सूचना तत्काल पुलिस प्रशासन को दी जाए। विद्यार्थियों के लिए नियमित कार्यशालाओं, संवाद कार्यक्रमों और काउंसलिंग सत्रों का आयोजन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निजी नशा मुक्ति केंद्रों की नियमित जांच और उनकी कार्यप्रणाली के मासिक मूल्यांकन के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित करने के निर्देश भी दिए।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया