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ईको-टूरिज्म पर कार्यशाला, सतत पर्यटन विकास पर हुआ मंथन

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ईको-टूरिज्म पर कार्यशाला, सतत पर्यटन विकास पर हुआ मंथन


धर्मशाला, 05 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने के उद्देश्य से शनिवार को ईको-टूरिज्म वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ईको-टूरिज्म से जुड़े विभिन्न पहलुओं, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला के दौरान ईको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने तथा प्रदेश की प्राकृतिक एवं वन संपदा के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश कैडर के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी के. थिरुमल ने ईको-टूरिज्म की संभावनाओं और इसके सतत विकास को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता, वन संपदा और जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए ईको-टूरिज्म को इस तरह विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिल सके।

कार्यशाला में कम्युनिटी फॉरेस्ट्री की भूमिका पर भी चर्चा हुई। स्थानीय समुदायों को ईको-टूरिज्म गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण बताया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य हिमाचल में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन मॉडल विकसित करना रहा। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में ईको-टूरिज्म तथा कम्युनिटी फॉरेस्ट्री से जुड़े अधिकारियों और प्रतिभागियों ने भाग लिया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया