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किन्नौर के डॉ. राजेश के. मेहता ने बढ़ाया हिमाचल के मान, अमेरिका में बने प्रतिष्ठित डिस्टिंग्विश्ड फेलो

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किन्नौर के डॉ. राजेश के. मेहता ने बढ़ाया हिमाचल के मान, अमेरिका में बने प्रतिष्ठित डिस्टिंग्विश्ड फेलो


धर्मशाला, 01 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के छोटे से गांव स्पिलो से निकलकर अमेरिका में चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. राजेश के. मेहता ने प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उन्हें अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री (एएसीएपी) की ओर से प्रतिष्ठित डिस्टिंग्विश्ड फेलो (डीएफएएसीएपी) सम्मान से नवाजा गया है। बीते 28 अक्तूबर को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित एकेडमी की वार्षिक बैठक में उन्हें पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं, शिक्षा, शोध, नेतृत्व और पेशेवर योगदान के लिए दिया जाता है। इसे एकेडमी की सर्वोच्च सदस्यता श्रेणी माना जाता है।

डॉ. मेहता आईजीएमसी शिमला के वर्ष 2000 एमबीबीएस बैच के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा किन्नौर के नेसांग और भाभानगर में प्राप्त की। इसके बाद सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा से शिक्षा हासिल की और स्कूल के 15वें बैच के विद्यार्थी रहे। वर्ष 2000 में आईजीएमसी शिमला में एमबीबीएस में दाखिला लेने के बाद वर्ष 2006 में उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद अमेरिका की सेंट लुइस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन से मनोचिकित्सा में रेजिडेंसी और इंस्टीट्यूट ऑफ लिविंग, हार्टफोर्ड से बाल एवं किशोर मनोचिकित्सा में फेलोशिप हासिल की।

वर्तमान में डॉ. मेहता अमेरिका के वर्जीनिया स्थित चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल ऑफ द किंग्स डॉटर्स में बाल, किशोर एवं सामान्य मनोचिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही वह ईस्टर्न वर्जीनिया मेडिकल स्कूल में असिस्टेंट प्रोफेसर और बाल एवं किशोर मनोचिकित्सा फेलोशिप कार्यक्रम में मनोचिकित्सा प्रशिक्षण के निदेशक भी हैं।

इससे पहले वह केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी और मेट्रोहेल्थ मेडिकल सेंटर, क्लीवलैंड में भी विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संबंधी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। डॉ. मेहता का विशेष कार्य मनोचिकित्सा शिक्षा, परिवार केंद्रित मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और चिकित्सा संगठनों में नेतृत्व से जुड़ा रहा है। वह अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन के फेलो भी हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया