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डल झील के सौंदर्यीकरण पर उठे सवाल, निकाली गई गाद बारिश से फिर पहुंची झील में

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डल झील के सौंदर्यीकरण पर उठे सवाल, निकाली गई गाद बारिश से फिर पहुंची झील में


धर्मशाला, 12 जुलाई (हि.स.)।

पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज के समीप स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की नड्डी डल झील के सौंदर्यीकरण और पुनर्जीवन का कार्य इन दिनों जारी है। झील की वर्षों से जमा गाद और मिट्टी निकालकर इसकी जलधारण क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, बरसात शुरू होने के बाद झील से निकाली गई गाद और मिट्टी दोबारा बहकर झील में पहुंचने लगी है, जिससे किए जा रहे कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कंपनी और ठेकेदार की ओर से निकाली गई गाद के सुरक्षित निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं की गई। बारिश के चलते मिट्टी वापस झील में समा रही है, जिससे पूरे अभियान का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय समाजसेवियों और धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए संबंधित विभाग से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो झील के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर खर्च की जा रही राशि का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निकाली गई गाद के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि झील के पुनर्जीवन का कार्य प्रभावी ढंग से पूरा हो सके और इस महत्वपूर्ण पर्यटन एवं धार्मिक स्थल का संरक्षण हो सके।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से झील से पानी का रिसाव नही रुक पा रहा था। हालांकि पानी का रिसाव रोकने को प्रशासन ने लाखों खर्च किये लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नही आये। बाद में लेक मैन ऑफ इंडिया के नाम से विख्यात प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और जल संरक्षणवादी बंगलुरू के आनंद मल्लिगावड़ को विशेष तौर पर बुलाया गया।

उन्होंने झील का निरीक्षण किया और पानी के रिसाव को रोकने की तकनीक साझा की। जिसके बाद पानी का रिसाव काफी हद तक रुक तो गया परन्तु अब गाद की समस्या को निपटाने में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया