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वारंटी के बावजूद वसूले 1.10 लाख, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को दिया पैसे लौटाने का आदेश

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धर्मशाला, 02 अप्रैल (हि.स.)। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग कांगड़ा ने एक अहम फैसले में वाहन डीलर और कंपनी को उपभोक्ता से वसूली गई मरम्मत राशि वापस करने का आदेश दिया है। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए यह फैसला सुनाया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कांगड़ा जिला के नगरोटा बगवां निवासी सरूप चंद ने 18 जून 2024 को एक नई ब्रेज़ा कार खरीदी थी। उन्होंने वाहन के साथ 16,484 की एक्सटेंडेड वारंटी भी ली थी, जो 17 जून 2029 या 1 लाख किलोमीटर तक मान्य थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार 22 सितंबर 2025 को उनकी गाड़ी गोपालपुर के पास खराब हो गई, जिसके बाद उसे डीलर के पास ले जाया गया। जांच में इंजन चैम्बर में खराबी बताई गई। वारंटी के बावजूद वाहन को 45 दिनों तक रोके रखा गया और बाद में मरम्मत के नाम पर 1,10,521 की मांग की गई।

मजबूरी में उपभोक्ता ने यह राशि जमा कर दी, लेकिन बाद में इसे सेवा में कमी बताते हुए आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष (डीलर और कंपनी) की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते मामला एकतरफा (एक्स-पार्टी) चला। आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों को सही मानते हुए पाया कि वारंटी के तहत आने वाली मरम्मत के लिए शुल्क लेना गलत है।

उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि इतनी बड़ी कंपनी के वाहन के पार्ट्स उपलब्ध न होना और गाड़ी को 45 दिन तक रोके रखना भी सेवा में कमी है। आयोग ने डीलर और कंपनी को संयुक्त रूप से निर्देश दिए हैं कि शिकायतकर्ता को 1,10,521 की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाई जाए। इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 15 हजार मुआवजा दिया जाए और साथ ही 10 हजार वाद खर्च के रूप में अदा किए जाने के भी आदेश दिए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया