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चीन के एथनिक यूनिटी लॉ के खिलाफ दुनियाभर में बुलंद की जायेगी आवाज : टीवाईसी

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धर्मशाला, 02 अगस्त (हि.स.)। तिब्बती युवा कांग्रेस द्वारा शहीद लोबगा रांगज़ेन के सम्मान में दुनिया भर में चेन प्रोटेस्ट शुरू किया जा रहा है। इसी के साथ चीन के तथाकथित एथनिक यूनिटी लॉ' के खिलाफ भी विरोध जारी रहेगा। इसके साथ ही सभी पॉलिटिकल कैदियों को रिहा करने सहित अन्य मांगों को लेकर संगठन का विरोध जारी रहेगा। यह बात तिब्बती युवा कांग्रेस के अध्यक्ष लोबसांग सेरिंग ने रविवार को जारी एक प्रेस बयान में कही। उन्होंने कहा कि चीन सरकार के खिलाफ तिब्बती युवा कांग्रेस (टीवाईसी) धर्मशाला से स्थानीय युवा कांग्रेस और समर्थकों के जरिए दुनिया भर में चेन विरोध प्रदर्शन का आगाज़ करेंगे।

यह अंतर्राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन शहीद लोबगा रांगजेन के सबसे बड़े बलिदान के सम्मान में है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समाज की चेतना जगाने और दुनिया को यह बात याद दिलाने के लिए आत्मदाह कर लिया कि तिब्बत एक कब्जा किया हुआ देश है और तिब्बती अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उनके बलिदान को नज़रअंदाज करना, दबाया या मिटाया नहीं जा सकता है। हम दृढ़ संकल्प रखते हैं की उनका आखिरी संदेश दुनिया भर में तब तक गूंजता रहेगा जब तक तिब्बती लोगों के आज़ादी के संघर्ष को लेकर ध्यान केंद्रित नहीं होता और चीन के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।

धर्मशाला से शुरू होकर तिब्बती यूथ कांग्रेस एक चेन भूख हड़ताल करेगी जिसके साथ प्रदर्शन, कैंडल मार्च, पब्लिक रैलियां, जागरुकता कैंपेन, कूटनीतिक पंहुच और दुनिया भर में शांतिपूर्ण कार्रवाई होगी। यह कार्रवाई हर दिन जारी रहेगी जिसमें दुनिया भर में रह रहे तिब्बती युवा कांग्रेस के शाखाओं और समर्थक एकता के साथ विरोध में खड़े होंगे।

एथनिक यूनिटी कानून का होगा जोरदार विरोध

टीवाईसी नेता ने कहा कि तिब्बती युवा कांग्रेस पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना द्वारा लागू किए गए तथाकथित एथनिक यूनिटी कानून को भी साफ तौर पर खारिज करती है। यह कानून एकता का कानून नहीं है बल्कि एक राजनीतिक तरीका है। इस कानून के तहत चीन द्वारा क़ब्ज़ा किए गए देशों जिनमें तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान, दक्षिणी मंगोलिया और मंचूरिया आदि को जबरन अपने में मिलाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए बनाया गया है।

एथनिक यूनिटी की भाषा के पीछे एकतरफा कंट्रोल का एजेंडा है जिसका उद्देश्य राजनीतिक संतुलन के जरिए तिब्बतियों को अपने में मिलाने के मकसद से बनाई गई पॉलिसियों को संस्थापन करना है। चीनी सरकार की स्थानीय मूल भाषाओं को दबाकर धार्मिक संस्थाओं को कमज़ोर कर के इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश जारी है। चीनी सरकार सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करके बच्चों को कॉलोनियल बोर्डिंग स्कूलों के जरिए उनके समुदायों से अलग करके और मूल निवासियों की पहचान को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफ़ादारी में बदलकर तिब्बती की राष्ट्रीय पहचान को खत्म करना चाहती है। लोबगा रांगज़ेन ने यूनाइटेड नेशंस हेडक्वार्टर के सामने अपनी जान दे दी है। हम यूनाइटेड नेशंस से अपील करते हैं कि वह तिब्बत में हो रहे मानवाधिकार की गंभीर स्थिति पर ध्यान देकर सही और औपचारिक तरीके से जवाब दे जिनके कारण उन्हें अपनी कुर्बानी देने पर मजबूर किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया