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मित्रों को खुश करने के चक्कर में सुक्खू सरकार ने प्रदेश को आर्थिक गर्त में धकेला : विपिन परमार

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मित्रों को खुश करने के चक्कर में सुक्खू सरकार ने प्रदेश को आर्थिक गर्त में धकेला : विपिन परमार


धर्मशाला, 17 मार्च (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा कैबिनेट रैंक को वापस लिए जाने का निर्णय न केवल देर से लिया गया कदम है, बल्कि यह इस बात का भी स्पष्ट प्रमाण है कि प्रदेश की आर्थिक बदहाली के लिए सीधे तौर पर स्वयं मुख्यमंत्री और उनकी कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस फैसले को सरकार आज मजबूरी में ले रही है, उसे बहुत पहले ही जनहित में लागू किया जाना चाहिए था।

मंगलवार को जारी एक प्रेस बयान में विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है कि बीते समय में किस प्रकार सत्ता का दुरुपयोग करते हुए कैबिनेट रैंक और अन्य लाभकारी पद रेवड़ियों की तरह बांटे गए। यह सब केवल अपने चहेते मित्रों और समर्थकों को खुश करने के लिए किया गया। शासन का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया ही आज हिमाचल प्रदेश को आर्थिक गर्त में धकेलने का मुख्य कारण बना है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश का विकास नहीं, बल्कि अपने करीबी लोगों को लाभ पहुंचाना रही। जिस प्रकार से बिना किसी ठोस आवश्यकता के कैबिनेट रैंक प्रदान किए गए, उससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ा। आज जब वित्तीय स्थिति चरमरा चुकी है, तब जाकर सरकार को अपनी गलतियों का एहसास हो रहा है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है।

परमार ने कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर प्रदेश के हितों को दरकिनार कर किसके दबाव में या किस स्वार्थ के चलते यह फैसले लिए गए।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि जिन लोगों को अब तक सरकारी खर्चे पर सुविधाएं दी जा रही थीं, गाड़ियां, स्टाफ, आवास और अन्य लाभ, उनका खर्च आखिर किसके पैसे से चल रहा था। यह स्पष्ट है कि यह सब जनता की गाढ़ी कमाई से ही हो रहा था। ऐसे में सरकार की जवाबदेही और भी बढ़ जाती है।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हुए निजी संबंधों को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी और यह बताना होगा कि प्रदेश को इस स्थिति तक पहुंचाने के लिए कौन जिम्मेदार है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया