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हिमाचल के लोकगायक विक्की चौहान की पत्नी जिला परिषद चुनाव हारीं

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हिमाचल के लोकगायक विक्की चौहान की पत्नी जिला परिषद चुनाव हारीं


शिमला, 01 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय पहाड़ी लोकगायक विक्की चौहान की पहचान और लोकप्रियता भी जिला परिषद चुनाव में उनकी पत्नी श्वेता चौहान को जीत नहीं दिला सकी। शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र के सरस्वती नगर जिला परिषद वार्ड से भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरीं श्वेता चौहान को कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी नेहा मेहता ने 2891 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया।

श्वेता चौहान के चुनावी मैदान में उतरने के साथ ही सरस्वती नगर सीट प्रदेश की सबसे चर्चित जिला परिषद सीटों में गिनी जाने लगी थी। भाजपा ने एक ऐसे चेहरे पर दांव लगाया था, जो सीधे तौर पर हिमाचल के सबसे चर्चित लोकगायकों में से एक विक्की चौहान से जुड़ा था। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए भी यह सीट बेहद अहम थी, क्योंकि यह क्षेत्र शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का गृह इलाका और पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, प्रतिष्ठा और राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा था।

चुनाव प्रचार के दौरान श्वेता चौहान ने अपनी पहचान केवल एक मशहूर कलाकार की पत्नी तक सीमित नहीं रखी। उन्होंने मतदाताओं के सामने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों और सामाजिक दृष्टिकोण को भी रखा। उन्होंने बताया था कि उन्होंने बीएससी, बीएड और माइक्रोबायोलॉजी की पढ़ाई की है, टीईटी उत्तीर्ण किया है और प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षाओं में भी हिस्सा लिया है। उनका कहना था कि वह समाज के लिए काम करने के उद्देश्य से राजनीति में आई हैं।

हालांकि चुनाव परिणाम ने दिखाया कि स्थानीय चुनावों में लोकप्रियता और पहचान हमेशा वोटों में नहीं बदलती। सरस्वती नगर के मतदाताओं ने आखिरकार कांग्रेस समर्थित नेहा मेहता पर भरोसा जताया और भाजपा की इस हाई-प्रोफाइल दावेदारी को स्वीकार नहीं किया।

विक्की चौहान हिमाचल के उन लोकगायकों में शामिल हैं जिनके गीत गांवों से लेकर शहरों तक सुने जाते हैं। शिमला जिले की जुब्बल तहसील के छाजपुर गांव से संबंध रखने वाले विक्की चौहान ने अपने गीत ‘नीरू चाली घूमदी’, ‘झुमके-झुमके’ और ‘किंदे चाली बाठणे’ से प्रदेशभर में पहचान बनाई है। नामांकन के समय उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपनी पत्नी के लिए समर्थन और आशीर्वाद भी मांगा था। यही वजह थी कि श्वेता चौहान की उम्मीदवारी ने चुनावी मुकाबले को सामान्य स्थानीय चुनाव से कहीं अधिक चर्चित बना दिया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा