home page

स्कूल-कॉलेज बंद करने के बजाय छात्र संख्या बढ़ाने पर ध्यान दे सरकार : जयराम ठाकुर

 | 
स्कूल-कॉलेज बंद करने के बजाय छात्र संख्या बढ़ाने पर ध्यान दे सरकार : जयराम ठाकुर


शिमला, 22 जून (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने के मामले में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि छात्र संख्या कम होने का हवाला देकर शिक्षण संस्थानों को बंद करने के बजाय सरकार को उनमें विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

शिमला में सोमवार को ननखड़ी क्षेत्र से आए एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार द्वारा राजकीय महाविद्यालय ननखड़ी सहित प्रदेश के 10 महाविद्यालयों को बंद करने का फैसला दूरदर्शिता से रहित है। उनके अनुसार ननखड़ी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में स्थित महाविद्यालय स्थानीय विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख साधन हैं और इनके बंद होने से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में एकरूपता नहीं है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि एक ओर सरकार संसाधनों की कमी का हवाला देकर शिक्षण संस्थान बंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ मामलों में अपने फैसले वापस भी ले रही है। उनके अनुसार हाल ही में बंद किए गए 10 महाविद्यालयों में से पांच को दोबारा खोला गया, जिससे यह सवाल उठता है कि निर्णय किन मानकों के आधार पर लिए जा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिमाचल में शिक्षा के विस्तार की परंपरा रही है और दूरदराज़ क्षेत्रों में भी बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए स्कूल खोले गए हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से ननखड़ी महाविद्यालय को बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार की दुग्ध खरीद नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश में दूध खरीद को लेकर बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन कई क्षेत्रों से किसानों के विरोध और दूध न खरीदे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि दूध खरीद पर सीमा तय करने से अधिक उत्पादन करने वाले पशुपालकों को नुकसान हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों का दूध खरीदा जा रहा है, उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा। जयराम ठाकुर के मुताबिक सरकार को प्रचार से आगे बढ़कर पशुपालकों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि दुग्ध क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा