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आईआईटी मंडी के विशिष्ट प्रोफेसर गौतम आर. देसराजू को 14वें इवाल्ड पुरस्कार से किया सम्मानित

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आईआईटी मंडी के विशिष्ट प्रोफेसर गौतम आर. देसराजू को 14वें इवाल्ड पुरस्कार से किया सम्मानित


मंडी, 12 अगस्त (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के प्रोफेसर एमेरिटस गौतम आर. देसिराजू को अंतरराष्ट्रीय क्रिस्टलोग्राफी संघ द्वारा 14वें एवॉल्ड पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें क्रिस्टल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अग्रणी योगदान, सुप्रामॉलिक्यूलर सिंथॉन की अवधारणा तथा आणविक क्रिस्टलों और जैविक प्रणालियों में कमजोर हाइड्रोजन बंधन और हैलोजन बंधन के संरचनात्मक महत्व को स्थापित करने के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया है। एवॉल्ड पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय क्रिस्टलोग्राफी कांग्रेस के अवसर पर प्रत्येक तीन वर्ष में प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार क्रिस्टलोग्राफी विज्ञान में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।

वर्ष 2026 के पुरस्कार विजेता गौतम आर. देसिराजू को 11 अगस्त को कनाडा के कैलगरी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय क्रिस्टलोग्राफी संघ की कांग्रेस में इस वैश्विक सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रोफेसर देसिराजू भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु में प्रोफेसर एमेरिटस तथा आईकेएसएमएचए, आईआईटी मंडी में विशिष्ट प्रोफेसर सहित कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े हुए हैं।

इस सम्मान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रोफेसर एमेरिटस गौतम आर. देसिराजू ने कहा कि एवॉल्ड पुरस्कार को व्यापक रूप से किसी संरचनात्मक रसायनज्ञ या जीवविज्ञानी द्वारा प्राप्त किए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है, जो नोबेल पुरस्कार के बाद सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल है। यह पुरस्कार इसकी कठोर और गोपनीय चयन प्रक्रिया की पूर्ण व्यावसायिकता को रेखांकित करता है।

इस अवसर पर आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि प्रोफेसर देसिराजू को एवॉल्ड पुरस्कार मिलना आईआईटी मंडी और भारतीय विज्ञान के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। क्रिस्टल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके अग्रणी कार्य ने आणविक अंतःक्रियाओं की हमारी समझ को नई दिशा दी है और औषधि तथा उन्नत पदार्थों के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। हम उन्हें इस योग्य और प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मान के लिए हार्दिक बधाई देते हैं। इस पुरस्कार के अवसर पर प्रोफेसर देसिराजू ने अंतरराष्ट्रीय क्रिस्टलोग्राफी पत्रिका के सितंबर 2026 अंक में एक विशेष लेख प्रकाशित किया है। लेख का शीर्षक क्रिस्टल स्पष्ट, जटिलता का अभियांत्रिकीकरण है।

यह मुक्त-सुलभ और प्रथम-पुरुष शैली में लिखा गया एक आत्मपरक लेख है। जिसमें उस क्षेत्र के विकास की उनकी वैज्ञानिक यात्रा का वर्णन किया गया है। जिसकी स्थापना में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह लेख पुरस्कार के साथ प्रकाशित किया गया है और अंतरराष्ट्रीय क्रिस्टलोग्राफी संघ की 2026 कांग्रेस से संबंधित विशेष लेख-संग्रह का हिस्सा है।

यह लेख प्रोफेसर देसिराजू की उस वैज्ञानिक यात्रा को दर्शाता है, जो उन्होंने इलिनॉय विश्वविद्यालय में अपने शोधकार्य के दौरान शुरू की थी। उस समय उनके मन में एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न उठा—क्रिस्टल वही संरचनाएं क्यों अपनाते हैं, जो वे अपनाते हैं। प्रोफेसर देसिराजू की वैज्ञानिक विरासत का सबसे महत्वपूर्ण वैचारिक योगदान सुप्रामॉलिक्यूलर सिंथॉन की अवधारणा है, जिसे उन्होंने वर्ष 1995 में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण समीक्षा लेख में परिभाषित किया था। यह लेख इन वैज्ञानिक अवधारणाओं को उनके वास्तविक जीवन के उपयोगों से जोड़ता है। प्रोफेसर देसिराजू का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अगले पांच से दस वर्षों में क्रिस्टल संरचना पूर्वानुमान की समस्या का पूर्ण समाधान करने में सक्षम हो सकती है। उनके शोध का एक नया क्षेत्र ऐसे यांत्रिक रूप से विकृत किए जा सकने वाले क्रिस्टलों से संबंधित है, जो मुड़ सकते हैं, खिसक सकते हैं या स्वयं को पुनः ठीक कर सकते हैं।

प्रोफेसर गौतम आर. देसिराजू के नाम 475 से अधिक शोध प्रकाशन और 80,000 से अधिक उद्धरण हैं। उन्होंने वर्ष 2011 से 2014 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिस्टलोग्राफी संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। संरचनात्मक रसायन विज्ञान और क्रिस्टलोग्राफी के क्षेत्र में उनके योगदान ने विश्वभर में वैज्ञानिक अनुसंधान और चिंतन को गहराई से प्रभावित किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा