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आईआईएम छात्र आत्महत्या मामले में परिजनों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच

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आईआईएम छात्र आत्महत्या मामले में परिजनों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच


नाहन, 24 अगस्त (हि.स.)। आईआईएम सिरमौर (धौलाकुआं) के 19 वर्षीय छात्र प्रभात शुक्ला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में परिजनों ने संस्थान प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जबलपुर, मध्य प्रदेश निवासी छात्र के पिता अनुपम शुक्ला ने नाहन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि उनका बेटा बीएमएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। शुरुआती पुलिस जांच में मामला आत्महत्या का माना जा रहा था, लेकिन परिजनों का कहना है कि संस्थान प्रबंधन सच छुपाने और साक्ष्य मिटाने की कोशिश कर रहा है।

परिजनों ने बताया कि 16 अगस्त को छात्र की अपनी मां से आखिरी बार बात हुई थी। 20 अगस्त को जब परिजनों का फोन नहीं उठा तो उन्होंने हॉस्टल वार्डन से संपर्क किया, लेकिन पहले परीक्षा का बहाना बनाकर बात को टालने का प्रयास किया गया। बाद में संस्थान से परिजनों को केवल यह सूचना दी गई कि छात्र की तबीयत खराब है और वे तुरंत आ जाएं। परिजनों का आरोप है कि उन्हें छात्र की मृत्यु की पहली आधिकारिक जानकारी संस्थान प्रबंधन से नहीं, बल्कि पुलिस के माध्यम से प्राप्त हुई।

मीडिया से बात करते हुए परिजनों ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम के समय छात्र की कलाई पर पहले से कटी हुई चोट का निशान था और उस पर पट्टी बंधी हुई थी। परिजनों का दावा है कि छात्र ने कुछ दिन पहले भी अपनी कलाई काटने की कोशिश की थी, लेकिन संस्थान प्रबंधन ने इस गंभीर घटना की जानकारी न तो परिजनों को दी और न ही पुलिस या किसी मनोचिकित्सक से उसकी काउंसलिंग करवाई।इसके अलावा, परिजनों ने बताया कि जनवरी 2025 में छात्रों के साथ हुए एक विवाद की शिकायत करने पर संस्थान प्रशासन ने छात्र पर ही बात दबाने का दबाव बनाया था। सुरक्षा के नाम पर उसे एक अलग कमरे में शिफ्ट कर दिया गया था, जहां उसे कथित तौर पर रात में बाहर से ताला लगाकर बंद कर दिया जाता था और वह बाहर भी नहीं निकल पाता था। परिजनों के अनुसार, अन्य छात्रों से उसकी बातचीत बंद करवाकर उसका पूरी तरह से सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था।

परिजनों ने यह भी संदेह जताया है कि घटना के तुरंत बाद पूरे बैच और फ्लैट के अन्य छात्रों को अचानक एक हफ्ते की छुट्टी पर घर भेज दिया गया ताकि कोई बयान न दे सके। इसके साथ ही फ्लैट के कमरों की सफाई करवाकर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया है। परिजनों का दावा है कि उनके पास एक वीडियो भी है जिसमें संस्थान के अधिकारी छात्रों को पुलिस या मीडिया के सामने बयान न देने की चेतावनी दे रहे हैं।

इन सभी बिंदुओं को उठाते हुए परिजनों ने मांग की है कि स्थानीय पुलिस पर कार्यभार अधिक होने और संस्थान द्वारा मामले को घुमाने के प्रयासों के कारण निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि सच सामने लाने और परिसर में पढ़ रहे अन्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मामले की जांच विशेष जांच टीम को सौंपी जाए या सीबीआई से करवाई जाए। माजरा पुलिस थाना की टीम ने परिजनों के बयानों को शामिल कर जांच आगे बढ़ा दी है और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर