हिंदी को ज्ञान और शोध की भाषा बनाने पर जोर, आईआईएएस में हुआ समारोह
शिमला, 14 सितंबर (हि.स.)। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) शिमला में सोमवार को हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में हिंदी को केवल संवाद की भाषा तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी का इस्तेमाल कार्यालयीन कामकाज, शोध, शिक्षा और ज्ञान के आदान-प्रदान में सहज और प्रभावी तरीके से बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत अध्येता डॉ. अनुराधा रतूड़ी की सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी का हिंदी दिवस संदेश पढ़ा गया। संदेश में हिंदी को भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय अस्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की अभिव्यक्ति बताते हुए दैनिक कामकाज में सरल हिंदी के प्रयोग पर जोर दिया गया। ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प में हिंदी सहित भारतीय भाषाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में पुस्तकालय परिचर दीपक शर्मा, कार्यालय सहायक सुरेन्द्र रमौला, अध्येता डॉ. तहसीन मजहर, सह-अध्येता डॉ. कुमार वरुण, अध्येता डॉ. सुमेष्ठा और राष्ट्रीय अध्येता प्रोफेसर सच्चिदानंद मोहंती ने हिंदी के व्यवहारिक, संस्थागत, शैक्षणिक और बौद्धिक पक्षों पर विचार रखे। अध्यक्षीय संबोधन में अध्येता प्रोफेसर संजय भट्ट ने हिंदी को ज्ञान, चिंतन और विमर्श का प्रभावी माध्यम बनाने की जरूरत बताई।
आईआईएएस की ओर से नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस और छठे अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलन में भी भागीदारी की जा रही है। कार्यक्रम में डिजिटल तकनीक और बदलते ज्ञान के क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग की नई संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

