उन्नत चारा उत्पादन एवं पशुपालन : वैज्ञानिकों ने किसानों को दी आधुनिक कृषि एवं पशुपालन की जानकारी
मंडी, 11 अगस्त (हि.स.)। मंडी जिला की मांथला पंचायत के अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालक एवं किसान परिवारों को वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से सत बाला कामेश्वर मंदिर परिसर, देवधार, मंडी में उन्नत चारा घास बीज एवं कृषि उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम आईसीएआर भारतीय घास एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी के सेंटर फॉर इंडियन हिमालयन ग्रासलैंड, डायरेक्टरेट ऑफ कम्युनिटी सर्विसेज , करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय, हमीरपुर तथा प्रो. अनुपमा सिंह की कल्पतरु फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में अनुसूचित जाति उप याेजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम मशहूर कृषि वैाानिक डॉ. आर. के. राजू की पावन स्मृति को समर्पित रहा। कार्यक्रम में 150 से अधिक किसानों एवं पशुपालकों ने भाग लिया।
किसानों को उच्च प्रोटीनयुक्त चारा घासों की उपयोगिता, वैज्ञानिक तरीके से चारा उत्पादन, पशुओं के पोषण तथा दूध उत्पादन बढ़ाने के उपायों के बारे में विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई।आईसीएआर-आईजीएफआरआई के वैज्ञानिक प्रभारी डॉ. शीराज़ भट्ट, वैज्ञानिक सुरेंद्र पॉल तथा डॉ. गुलशन कुमार ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और उपलब्ध कृषि उपकरणों के प्रभावी उपयोग के बारे में जागरूक किया।
वैज्ञानिकों ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण एवं संतुलित पशु आहार, उन्नत चारा प्रजातियों तथा वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुपालक परिवार अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। इस अवसर पर मंथला पंचायत के 100 चयनित अनुसूचित जाति पशुपालक किसानों को उच्च प्रोटीनयुक्त चारा घासों जैसे सेटेरिया, पासपालम आदि के बीज एवं रूट स्लिप्स, साथ ही फावड़े, कुदाल एवं अन्य कृषि उपकरण वितरित किए गए। किसानों को इन उपकरणों के सही एवं प्रभावी उपयोग की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. संजीव शर्मा, ओएसडी सुश्री ऋचा शर्मा, डॉ. गुलशन कुमार सहित विश्वविद्यालय एवं आईसीएआर-आईजीएफआरआई के प्रतिनिधियों ने किसानों से संवाद किया और ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक कृषि एवं पशुपालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में मंथला पंचायत के प्रधान प्रवीण कुमार एवं उप-प्रधान महेश तथा सत बाला कामेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश, प्रिंस एवं समिति के अन्य कार्यकारिणी सदस्य भी उपस्थित रहे। स्थानीय पंचायत एवं मंदिर समिति द्वारा कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को ज्ञान, तकनीक, संसाधन और बाजार से जोड़ना आवश्यक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

