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एचआरटीसी कर्मियों का चक्का जाम अवैध, एस्मा के तहत होगी कार्रवाई : उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री

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एचआरटीसी कर्मियों का चक्का जाम अवैध, एस्मा के तहत होगी कार्रवाई : उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री


शिमला, 24 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारी यूनियन की प्रस्तावित हड़ताल और चक्का जाम की घोषणा के बीच उप मुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि चक्का जाम और हड़ताल पूरी तरह अवैध हैं और यदि कर्मचारी इस रास्ते पर आगे बढ़ते हैं तो सरकार आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) के तहत कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।

शिमला में बुधवार को पत्रकार वार्ता में मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने एचआरटीसी कर्मचारियों और पेंशनरों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभाया है। सरकार हर महीने समय पर वेतन और पेंशन का भुगतान कर रही है और अब तक इस मामले में कोई चूक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में हड़ताल की घोषणा कितनी उचित है, इसका फैसला प्रदेश की जनता खुद कर सकती है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने हमेशा कर्मचारियों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखा है और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए निकालने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को हुई बैठक में कर्मचारी नेताओं ने मुख्य रूप से एक तबादले के मुद्दे को उठाया, जबकि वित्तीय मांगों पर कोई चर्चा नहीं हुई। इसके बावजूद सरकार ने कर्मचारियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यदि कर्मचारी बसें नहीं चलाना चाहते हैं तो वे बसों की चाबियां सरकार को सौंप सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता प्रदेश की जनता को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। एचआरटीसी की बसों में रोजाना करीब पांच लाख यात्री सफर करते हैं और हड़ताल की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को होगी।

उन्होंने कहा कि एचआरटीसी कर्मचारियों को राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। इसके अलावा निगम में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ भी दिया गया है, जबकि कई अन्य सार्वजनिक उपक्रमों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि जून महीने का वेतन भी समय पर जारी कर दिया गया था, ऐसे में चक्का जाम की चेतावनी देना उचित नहीं है। अपनी मांगों को उठाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके मौजूद हैं और सरकार बातचीत के लिए तैयार है।

उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारी संगठन किसी न किसी बहाने चक्का जाम करने का रास्ता तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में निगम के लिए 813 नई बसें खरीदी गई हैं। इसके अलावा 2198 कर्मचारियों को अनुबंध से नियमित किया गया है और 145 पीस मील वर्करों को भी नियमित सेवाओं में लाया गया है। कंडक्टरों की भर्ती भी हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से करवाई गई है।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि राजनीतिक एजेंडे के तहत हड़ताल की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2016 में अदालत भी एचआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल को गलत ठहरा चुकी है। उन्होंने यूनियन नेताओं से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।

इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने कर्मचारियों और पेंशनरों को दिए गए वित्तीय लाभों का भी ब्यौरा रखा। उन्होंने बताया कि एक जनवरी 2023 से 30 मार्च 2026 तक एचआरटीसी पेंशनरों को कुल 239.45 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ दिए गए हैं। इनमें पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और संशोधित पेंशन से जुड़े भुगतान शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इसी अवधि में कर्मचारियों को भी 74.39 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ प्रदान किए गए हैं। इसमें ओवरटाइम और रात्रि भत्ता, महंगाई भत्ता, एरियर, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और वेतन से जुड़े अन्य लंबित भुगतान शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही प्रदेश की जनता को परेशानी में डालने वाले किसी भी कदम को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन चक्का जाम और हड़ताल का रास्ता कानून के दायरे में नहीं आता।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा