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शिक्षक भर्ती विधेयक के विरोध में शिक्षक कल्याण संघ का प्रदर्शन, अकादमिक स्वायत्तता की रक्षा की उठाई मांग

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शिक्षक भर्ती विधेयक के विरोध में शिक्षक कल्याण संघ का प्रदर्शन, अकादमिक स्वायत्तता की रक्षा की उठाई मांग


शिमला, 05 सितंबर (हि.स.)। शिक्षक दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ की ओर से शनिवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में प्रस्तावित शिक्षक भर्ती विधेयक के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। संघ ने कहा कि शिक्षक दिवस को इस बार केवल उत्सव के रूप में मनाने के बजाय शिक्षा की स्वतंत्रता, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, शिक्षक की गरिमा और उच्च शिक्षा के मूल्यों की रक्षा के संकल्प के रूप में मनाया गया।

प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में वरिष्ठ प्रोफेसर और शिक्षक शामिल हुए तथा प्रस्तावित विधेयक के विरोध में एकजुटता जताई। वरिष्ठ शिक्षकों ने कहा कि यह केवल भर्ती प्रक्रिया का विषय नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की अकादमिक स्वायत्तता, शिक्षा की गुणवत्ता और उच्च शिक्षा के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। उन्होंने कहा कि शिक्षक भर्ती व्यवस्था में विश्वविद्यालयों की विशिष्ट शैक्षणिक आवश्यकताओं और विषय विशेषज्ञता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

संघ के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि शिक्षक भर्ती विश्वविद्यालय की अकादमिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी व्यवस्था स्वीकार्य नहीं हो सकती, जो विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता को प्रभावित करे।

प्रो. जोगिंदर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध, विचार और नवाचार के स्वतंत्र केंद्र हैं। शिक्षक चयन में विषय विशेषज्ञता और अकादमिक योग्यता को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए।

संघ के सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षक की योग्यता का आकलन उसके विषय ज्ञान, शोध अनुभव, शिक्षण क्षमता और अकादमिक उपलब्धियों के आधार पर होना चाहिए। डॉ. अशोक बंसल ने पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संस्थागत स्वायत्तता की रक्षा पर जोर दिया।

डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय सामान्य सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि ज्ञान और शोध के प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए शिक्षक चयन में विषय विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

संघ ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं है। यह शिक्षा की स्वतंत्रता, शिक्षक की गरिमा और विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए है। संघ ने कहा कि इस संबंध में उसका शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध आगे भी जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला