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हिमाचल में यूजीसी सातवां वेतनमान लागू, सीएएस अटका, शिक्षकों की आंदोलन की चेतावनी

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हिमाचल में यूजीसी सातवां वेतनमान लागू, सीएएस अटका, शिक्षकों की आंदोलन की चेतावनी


शिमला, 13 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संयुक्त कार्यवाही समिति (जेएसी) ने राज्य सरकार पर उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है।

समिति ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा सातवां वेतनमान लागू किए जाने के बावजूद प्रदेश में करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) अब तक लागू नहीं की गई है, जिससे शिक्षकों की पदोन्नतियां पिछले तीन वर्षों से रुकी हुई हैं।

जेएसी के पदाधिकारियों ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि यूजीसी ने वेतन पुनरीक्षण समिति की सिफारिशों के आधार पर सातवां वेतनमान लागू किया था, जिसके अनुरूप देश के अधिकांश राज्यों में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षक वेतन और पदोन्नति के लाभ प्राप्त कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी वर्ष 2022 में अधिसूचनाएं जारी कर वेतनमान लागू किया, लेकिन उसमें सीएएस और उच्च योग्यता पर प्रोत्साहन वेतन वृद्धि को अलग आदेश से लागू करने की शर्त जोड़ दी गई।

समिति ने आरोप लगाया कि अलग अधिसूचना जारी न होने के कारण वर्ष 2022 से अब तक किसी भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हो पाई है। इससे विशेष रूप से उन शिक्षकों को नुकसान हो रहा है जो आगामी दो वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और अपनी वैध पदोन्नति से वंचित हैं।

जेएसी ने यह भी कहा कि प्रदेश के अन्य विभागों में कर्मचारियों को नियमित पदोन्नतियां और बकाया लाभ दिए जा रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। इससे शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही सीएएस लागू नहीं किया तो प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में भी स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर और संतुष्ट शिक्षकों पर निर्भर करती है।

जेएसी ने सरकार से मांग की है कि सातवें वेतनमान के तहत करियर एडवांसमेंट स्कीम को बिना किसी विलंब के लागू किया जाए और उच्च योग्यता पर प्रोत्साहन वेतन वृद्धि के लिए शीघ्र अधिसूचना जारी की जाए।

इस अवसर पर जेएसी के अध्यक्ष प्रो जनार्दन सिंह और महासचिव प्रो नितिन व्यास उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला