सीबीएसई नॉन मेडिकल प्रवेश में दसवीं में गणित विषय की अनिवार्यता को लेकर विद्यार्थियों को पुनः परीक्षा से छूट देने की मांग
मंडी, 29 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने कक्षा दसवीं में गणित के आधारभूत स्तर का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए कक्षा ग्यारहवीं में नॉन मेडिकल वर्ग में प्रवेश लेने की स्थिति में गणित की परीक्षा दोबारा देने की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने का आग्रह प्रदेश सरकार और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से किया है।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष विनोद सूद ने कहा कि विद्यार्थियों को उनकी रुचि, योग्यता और भविष्य की आकांक्षाओं के अनुसार विषय चुनने का अवसर मिलना चाहिए। यदि किसी विद्यार्थी ने कक्षा दसवीं तक गणित को आधारभूत स्तर पर पढ़ा है और बाद में कक्षा ग्यारहवीं में नॉन मेडिकल वर्ग में प्रवेश लेना चाहता है, तो केवल विषय चयन की पात्रता पूरी करने के लिए उसे गणित की परीक्षा दोबारा देने के लिए बाध्य करना विद्यार्थियों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव डालता है।
महासंघ के प्रांत मीडिया प्रमुख शशि शर्मा ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को विषय चयन में अधिक लचीलापन देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी कक्षा ग्यारहवीं में गणित को विषय के रूप में पढ़ना चाहता है, तो विद्यालय स्तर पर उसे आवश्यक पुनर्बलन एवं सेतु पाठ्यक्रम के माध्यम से गणित की अतिरिक्त तैयारी करवाई जा सकती है। इसके लिए दसवीं कक्षा की गणित की परीक्षा दोबारा करवाना ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गणित के आधारभूत स्तर के साथ दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को नॉन मेडिकल वर्ग में प्रवेश लेने के लिए गणित की पुनः परीक्षा देने की अनिवार्यता से छूट प्रदान की जानी चाहिए। विद्यार्थी को उसकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए तथा उसकी गणितीय दक्षता का आकलन कक्षा ग्यारहवीं में भी किया जा सकता है।
शशि शर्मा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए अवसरों का विस्तार करना होना चाहिए, न कि अनावश्यक प्रक्रियाओं के कारण उनके सामने बाधाएं खड़ी करना।
शिक्षक महासंघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि दसवीं कक्षा में गणित का आधारभूत स्तर पढ़ चुके विद्यार्थियों को कक्षा ग्यारहवीं में नॉन मेडिकल वर्ग चुनने के लिए गणित की पुनः परीक्षा देने से छूट प्रदान की जाए तथा इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी अपनी रुचि के विषय चुनने का समान अवसर मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

