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70 हजार करोड़ मिलते तो हिमाचल होता कर्ज मुक्त, ओपीएस कभी बंद नहीं होगी: मुख्यमंत्री सुक्खू

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70 हजार करोड़ मिलते तो हिमाचल होता कर्ज मुक्त, ओपीएस कभी बंद नहीं होगी: मुख्यमंत्री सुक्खू


शिमला, 06 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जिला मंडी के नाचन विधानसभा क्षेत्र के दियारगी में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि प्रदेश को केंद्र से उतनी वित्तीय सहायता मिलती जितनी पिछली सरकार को मिली थी, तो आज हिमाचल प्रदेश कर्ज मुक्त होता। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसी भी कीमत पर सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बंद नहीं होने देगी।

मुख्यमंत्री ने छातर में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल खोलने की घोषणा की और जनसभा में उपस्थित सभी महिला मंडलों को 51-51 हजार रुपये देने की भी घोषणा की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल और कांग्रेस नेता नरेश चौहान की मांगों को भी पूरा करने का आश्वासन दिया।

सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल को मिलने वाला लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार को पांच वर्षों में 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में मिले, लेकिन वित्तीय अनुशासन की कमी के कारण प्रदेश का कर्ज कम नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में लगभग एक हजार करोड़ रुपये के भवन बनाए गए जो आज खाली पड़े हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार को 17 हजार करोड़ रुपये आरडीजी मिला, लेकिन अगले वित्त वर्ष से वह भी बंद हो गया है। इसके बावजूद सरकार ने कर्मचारियों को 14 प्रतिशत महंगाई भत्ता और 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों के एरियर का भुगतान किया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में ओपीएस कभी बंद नहीं होगी और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार और चिट्टा तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है और प्रदेश में गुणवत्ता युक्त शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला