home page

सरकारी स्कूलों में रोज लगेगा 45 मिनट का जीरो पीरियड, कमजोर विद्यार्थियों पर रहेगा पूरा फोकस

 | 

शिमला, 21 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता मजबूत करने के लिए अब हर दिन 45 मिनट का अनिवार्य 'जीरो पीरियड' लगाया जाएगा। इस विशेष कक्षा में उन विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता दी जाएगी, जिन्हें हिंदी, अंग्रेजी और गणित जैसे विषयों में सीखने में कठिनाई आ रही है। समग्र शिक्षा अभियान ने लर्निंग एन्हांसमेंट प्रोग्राम (एलईपी)-2.0 के दूसरे चरण के तहत यह व्यवस्था शुरू की है, जो लगातार 12 सप्ताह तक चलेगी।

समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार शीतकालीन अवकाश वाले जिलों लाहुल-स्पीति, किन्नौर, शिमला, चंबा, मंडी, सोलन और सिरमौर के सरकारी मिडिल, हाई और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में यह कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके अलावा ऊना, सोलन और सिरमौर के एक्सट्रीम समर क्लोजिंग स्कूल भी इसी चरण में शामिल किए गए हैं।

अन्य ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले सरकारी स्कूलों में कक्षा सात से बारह तक के विद्यार्थियों के लिए जीरो पीरियड 17 अगस्त से शुरू होगा। वहीं कक्षा छह के विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में 17 अगस्त से लागू होगी। शिक्षा विभाग के अनुसार, कक्षा छह की कार्य पुस्तिकाएं 12 अगस्त तक सभी स्कूलों में पहुंच जाएंगी।

शिक्षा विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि जीरो पीरियड हर हाल में लगाया जाएगा। इस दौरान कोई परीक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल गतिविधि या अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। पूरे सप्ताह के दौरान तीन जीरो पीरियड गणित, दो अंग्रेजी और एक हिंदी के लिए निर्धारित किए गए हैं। विज्ञान विषय से जुड़ी सीखने की कमियों को नियमित कक्षाओं में ही दूर किया जाएगा।

इस अभियान के लिए समग्र शिक्षा ने 'संकल्प' नाम से विशेष कार्य पुस्तिकाएं और शिक्षकों के लिए हैंडबुक तैयार की हैं। 12 अगस्त से विद्यार्थियों की कार्य पुस्तिकाओं पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर उनका ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा। इसके अगले दिन 13 अगस्त को सभी संबंधित शिक्षकों के लिए यूट्यूब के माध्यम से ऑनलाइन ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें कार्यक्रम के संचालन और कार्यपद्धति की जानकारी दी जाएगी।

स्कूलों के प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को एलईपी-2.0 का प्रभारी बनाया गया है। उन्हें कार्यक्रम की नियमित निगरानी करने, विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा कमजोर विद्यार्थियों की प्रगति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा