हिमाचल के लेखक डॉ. संदीप शर्मा की पुस्तक ‘द कॉल ऑफ सॉइल’ का कोलंबो में विमोचन
शिमला, 24 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के लेखक डॉ. संदीप शर्मा की अंग्रेजी में अनुवादित कहानियों की पुस्तक ‘द कॉल ऑफ सॉइल’ का विमोचन श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में हुआ। 23 अक्टूबर को रामाडा होटल में आयोजित सातवें वर्ल्ड एनवायरनमेंट समिट-2026 के दौरान पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन दिल्ली स्थित एनवायरनमेंट एंड सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन ने किया।
पुस्तक में 21 कहानियां शामिल हैं। इन कहानियों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय भावनाओं, जीवन की विविध परिस्थितियों और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की इच्छा को सामने लाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में हिमाचल की पहाड़ी भाषा, संस्कृति, जीवनशैली और स्थानीय परंपराओं के बदलते स्वरूप के साथ आधुनिक विकास और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों को भी जगह दी गई है।
डॉ. संदीप शर्मा के अनुसार ‘द कॉल ऑफ सॉइल’ का मुख्य उद्देश्य समाज से जुड़े मुद्दों को अभिव्यक्त करना, जीवन के विभिन्न रंगों को चित्रित करना और मानवीय भावनाओं तथा इच्छाओं की गहराई को सामने लाना है। कहानियों के पात्र अपनी जड़ों से दूर जाने के बाद अपनी मिट्टी और अपने आकाश की ओर लौटने की इच्छा रखते हैं। पुस्तक में यह भाव भी उभरता है कि मनुष्य की पहचान उसकी जमीन, संस्कृति और सामाजिक परिवेश से गहराई से जुड़ी होती है।
विकास और सांस्कृतिक पहचान के बीच के द्वंद्व को दिखाती हैं कहानियां
पुस्तक में धरती पर बढ़ते अतिक्रमण, तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण और बाजार की शक्तियों के प्रभाव से पैदा होने वाले बदलावों को भी उठाया गया है। लेखक के अनुसार इन बदलावों के बीच मानवीय संवेदनशीलता पर असर पड़ रहा है। पारंपरिक कामकाज और आजीविका के साधनों में गिरावट के साथ समाज में शोषण की प्रवृत्ति बढ़ने की चिंता भी कहानियों में दिखाई देती है।
डॉ. शर्मा ने हिमाचल की विशिष्ट पहाड़ी भाषा, जीवन-पद्धति, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने को भी अपनी रचनाओं का अहम विषय बनाया है। पुस्तक में प्राचीन सभ्यता और आधुनिक जीवन के बीच के अंतर को सामने रखा गया है। एक ओर विकास और आधुनिकता की चमक है, वहीं दूसरी ओर अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने की चिंता है।
कहानियां समानता और न्याय पर आधारित समाज की आकांक्षा के साथ आर्थिक और सामाजिक असमानताओं के बढ़ने से पैदा होने वाले विरोधाभासों को भी सामने लाती हैं। इनमें मानवीय संवेदना, सामाजिक चेतना और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने का भाव प्रमुखता से उभरता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

