हिमाचल में बारिश-बर्फबारी, शिमला में दिसम्बर जैसी ठंड, भूस्खलन से 61 सड़कें बंद
शिमला, 28 सितंबर (हि.स.)। मानसून की विदाई से पहले हिमाचल प्रदेश में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से सितंबर के आखिरी दिनों में कई क्षेत्रों में जुलाई-अगस्त जैसी तेज बारिश हुई। शिमला में सोमवार को दिनभर मूसलाधार बारिश हुई और ठंड बढ़ने से लोगों ने गर्म कपड़े और हीटर निकाल लिए। लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई। बारिश और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ और शाम तक राज्य में 61 सड़कें बंद रहीं। किन्नौर में एक राष्ट्रीय राजमार्ग भी कई घण्टे बंद रहा, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया। शिमला के रोहड़ू में भूस्खलन का मलबा सुंदरू खड्ड में गिरा।
मौसम विभाग के अनुसार 29 सितंबर को भी बारिश हो सकती है, जबकि 30 सितंबर से 4 अक्टूबर तक मौसम साफ रहने की संभावना है। इसी अवधि में दक्षिण-पश्चिम मानसून के हिमाचल से विदा होने के आसार हैं। इस मानसून सीजन में बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 373 लोगों की मौत हुई है और राज्य को करीब 3,220 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है।
शिमला में दिनभर मूसलाधार बारिश, ठिठुरन बढ़ी
कई दिनों तक शुष्क मौसम रहने के बाद सोमवार को राजधानी शिमला में जोरदार बारिश हुई। सुबह से लेकर शाम तक बारिश का दौर जारी रहा। इससे स्कूली बच्चों, रोजमर्रा के काम से बाहर निकले लोगों और शिमला घूमने पहुंचे पर्यटकों को परेशानी हुई। तापमान में गिरावट के चलते शहर में ठंड बढ़ गई और लोगों ने गर्म कपड़ों के साथ घरों और दुकानों में हीटर का सहारा लिया। सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम का यह बदलाव लोगों को दिसंबर जैसी ठंड का अहसास करा रहा है।
राज्य के मैदानी क्षेत्रों में भी कई जगह बारिश हुई। वहीं, लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर जारी रहा। बारिश और बर्फबारी के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड और बढ़ गई है।
24 घंटे में कांगड़ा एयरपोर्ट क्षेत्र में 70 मिलीमीटर बारिश
मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटे में कांगड़ा एयरपोर्ट क्षेत्र में सबसे अधिक 70 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला में 60 मिलीमीटर, किन्नौर के सांगला में 50 मिलीमीटर, शिमला के सराहन में 40 मिलीमीटर, मंडी के कटौला में 40 मिलीमीटर और सिरमौर के पांवटा साहिब में 30 मिलीमीटर बारिश हुई।
मौसम विभाग ने 29 सितंबर को भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। इसके बाद 30 सितंबर से 4 अक्टूबर तक प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है। इसी दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के राज्य से विदा होने की संभावना है।
रोहड़ू में भूस्खलन, सुंदरू खड्ड में गिरा मलबा
शिमला जिला के रोहड़ू उपमंडल में सोमवार को भारी भूस्खलन हुआ। छोहरा विकास खंड के जंगलिख गांव के समीप पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा गिरकर सुंदरू खड्ड में जा पहुंचा। भूस्खलन से जंगलिख गांव को जाने वाला पैदल रास्ता भी अवरुद्ध हो गया।
मलबा खड्ड में गिरने के बाद कुछ समय के लिए पानी का बहाव प्रभावित हुआ। बाद में पानी का बहाव सामान्य हो गया। प्रशासन ने स्थिति का जायजा लेने के लिए तहसीलदार चिड़गांव को मौके पर भेजा।
एसडीएम रोहड़ू धर्मेश रामोत्रा ने बताया कि सुंदरू खड्ड में मलबा गिरने से पानी का बहाव थोड़ी देर प्रभावित हुआ था, लेकिन अब बहाव सामान्य है। उन्होंने कहा कि खड्ड में झील बनने जैसी कोई स्थिति नहीं है। प्रशासन मौके की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
शाम तक 61 सड़कें बंद, 49 ट्रांसफार्मर ठप
बारिश और भूस्खलन से राज्य में कई जगह सड़क और बिजली सेवाएं प्रभावित हुईं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार सोमवार सुबह तक प्रदेश में एक राष्ट्रीय राजमार्ग और 66 सड़कें बंद थीं। किन्नौर के पूह उपमंडल में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 अवरुद्ध था। इसके अलावा मंडी में 29, लाहौल-स्पीति में 19, कांगड़ा में छह, कुल्लू में पांच, सिरमौर में तीन, ऊना में दो तथा शिमला और किन्नौर में एक-एक सड़क बंद थी।
सुबह राज्य में 118 ट्रांसफार्मर खराब होने से कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। इनमें किन्नौर के कल्पा और पूह में 42, मंडी के गोहर और जोगिंदरनगर में 34 तथा सिरमौर के राजगढ़ में 27 ट्रांसफार्मर शामिल थे। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमों ने दिनभर बहाली का काम किया।
शाम तक अधिकांश ट्रांसफार्मर बहाल कर दिए गए और प्रदेश में 49 ट्रांसफार्मर ही बंद रह गए। इनमें किन्नौर में 33, शिमला के रामपुर में सात, चंबा के डलहौजी में छह और मंडी के गोहर में तीन ट्रांसफार्मर शामिल थे। सड़क मार्गों की स्थिति में भी सुधार हुआ और शाम तक 61 सड़कें बंद रहीं। किन्नौर में अवरुद्ध राष्ट्रीय राजमार्ग को भी बहाल कर दिया गया।
मानसून में 373 लोगों की मौत, 3,220 करोड़ का नुकसान
इस मानसून सीजन में बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 373 लोगों की मौत हो चुकी है। चार लोग लापता हैं और 623 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 221 की जान सड़क हादसों में गई है, जबकि 152 मौतें भूस्खलन, अचानक बाढ़, डूबने, बहने, फिसलने और बारिश से जुड़े अन्य हादसों में हुई हैं। मानसून के दौरान 581 मवेशियों की भी मौत हुई है।
राज्य में मानसून से करीब 3,220 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। 146 मकान पूरी तरह और 530 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 18 दुकानें, छह घराट और 497 पशुशालाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।
लोक निर्माण विभाग को सड़कों और पुलों को हुए नुकसान से करीब 2,744 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

