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हिमाचल में 8 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट, भूस्खलन से 46 सड़कें बंद, नदियां-नाले उफान पर

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हिमाचल में 8 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट, भूस्खलन से 46 सड़कें बंद, नदियां-नाले उफान पर


शिमला, 02 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय है और अगले कई दिन राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग ने 8 जुलाई तक राज्य के कई हिस्सों में भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार 3,5 और 6 जुलाई के लिए कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 7 और 8 जुलाई को येलो अलर्ट रहेगा। 4 जुलाई को भी मौसम खराब रहेगा, लेकिन अलर्ट नहीं है।

गुरुवार को भी शिमला सहित राज्य के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश का क्रम जारी है। बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में व्यापक वर्षा दर्ज की गई। सिरमौर के पांवटा साहिब में सबसे ज्यादा 100 मिमी वर्षा हुई, कसौली में 86, धर्मपुर में 83, जतौंन बैरेज में 77, धौलाकुआं में 69, पच्छाद में 60, रामपुर में 53, ऊना में 50, नाहन में 39 व पालमपुर में 38 मिमी वर्षा हुई। इससे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया। मौसम विभाग ने लोगों से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।

46 सड़कें बंद, 181 ट्रांसफार्मर ठप, पेयजल योजनाएं भी प्रभावित

बारिश और भूस्खलन का असर सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार गुरुवार सुबह तक प्रदेश में 46 सड़कें बंद थीं। इनमें कुल्लू में सबसे अधिक 18 सड़कें प्रभावित हैं, मंडी में 15, सिरमौर में 9 तथा ऊना और लाहौल-स्पीति में 2-2 सड़कें बंद हैं। प्रदेश में 181 बिजली ट्रांसफार्मर भी ठप हैं। सबसे अधिक 122 ट्रांसफार्मर मंडी जिले में खराब हुए हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित है। सिरमौर के नाहन क्षेत्र में 43 और चंबा में 12 ट्रांसफार्मर बंद हैं। बिलासपुर के झंडूता क्षेत्र में छह पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे लोगों को पानी की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

लाहौल में जाहलमा नाले पर फोर-बाय-फोर वाहनों की आवाजाही शुरू

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से लाहौल घाटी में जनजीवन प्रभावित है। उफान पर आए जाहलमा नाले ने एक बार फिर सड़क संपर्क को प्रभावित किया। बीते दिनों आई बाढ़ में तांदी-उदयपुर-तिंदी-किलाड़ को जोड़ने वाला वैकल्पिक सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। सीमा सड़क संगठन ने लगातार चार दिनों तक कठिन परिस्थितियों में काम कर अस्थायी वैकल्पिक मार्ग तैयार किया है। इस मार्ग पर अब केवल फोर-बाय-फोर वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई है। पिछले चार दिनों से दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंसे हुए थे और अब सबसे पहले उन्हें निकाला जा रहा है। छोटे और भारी वाहनों के लिए रास्ता अभी बंद है। सुबह से जारी तेज बारिश के कारण घाटी में ठंड बढ़ गई है और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। प्रशासन और सीमा सड़क संगठन लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि बारिश जारी रहने पर जाहलमा नाले का जलस्तर फिर बढ़ सकता है।

किन्नौर में बाढ़ का खतरा, कड़छम बांध से बढ़ाई गई पानी की निकासी

किन्नौर जिले में भी लगातार बारिश के चलते हालात पर नजर रखी जा रही है। लीपा नाले में बाढ़ आने से पेजर खड़ का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे खड़ के किनारे बने मकानों पर खतरा पैदा हो गया है। इसी बीच सतलुज नदी में बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए कड़छम बांध प्रबंधन ने गुरुवार सुबह 7:30 बजे रेडियल गेट के माध्यम से अतिरिक्त 100 क्यूमेक पानी छोड़ा। पहले डाउनस्ट्रीम में 94 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा था। अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद रेडियल गेट से जल निकासी बढ़कर 194 क्यूमेक हो गई है। सिल्ट फ्लशिंग गेट से पहले से 83 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस तरह डाउनस्ट्रीम की ओर कुल जल निकासी 277 क्यूमेक पहुंच गई है। बांध प्रबंधन ने कहा है कि सतलुज नदी में जलप्रवाह बढ़ने पर अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जा सकता है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों, मछुआरों और पर्यटकों से सतर्क रहने और नदी के पास नहीं जाने की अपील की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा