हिमाचल विधानसभा : शून्यकाल में उठे मुद्दों के लिए बनेगी निगरानी समिति
शिमला, 31 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को शून्यकाल को लेकर गंभीरता बढ़ाने की पहल की गई है। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा है कि शून्यकाल के दौरान विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में वह स्वयं भी सदस्य होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट सत्र के बाद वह खुद शून्यकाल में उठने वाले विषयों की समीक्षा करेंगे और संबंधित विभागों को इन मामलों का समाधान करने के लिए निर्देश देंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने यह बात उस समय कही जब शून्यकाल के दौरान विधायक रणधीर शर्मा ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। रणधीर शर्मा ने कहा कि उन्होंने अब तक शून्यकाल में 10 मुद्दे उठाए हैं, लेकिन किसी का भी जवाब सरकार की ओर से नहीं मिला है। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि विधानसभा ने जिस गंभीरता के साथ शून्यकाल की शुरुआत की थी, सरकार उसे उसी गंभीरता से नहीं ले रही है।
रणधीर शर्मा ने अपने विधानसभा क्षेत्र श्री नयना देवी जी में बिजली की समस्या को भी उठाया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बार-बार बिजली कट लग रहे हैं और कई बार कई दिनों तक बिजली नहीं रहती। जब बिजली आती भी है तो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का एक बड़ा कारण फील्ड स्टाफ की कमी है और सरकार को जल्द भर्ती करनी चाहिए।
वहीं विधायक सुरेश कुमार ने समीरपुर वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में कक्षाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए पर्याप्त क्लासरूम नहीं हैं और स्कूल भवन के विस्तार के लिए पास की निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाना चाहिए, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
विधायक रीना कश्यप ने अपने क्षेत्र में सड़कों की खराब हालत का मामला उठाया और सरकार से इनके सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सड़कों के सुधार का प्रस्ताव उन्होंने विधायक प्राथमिकता में भी शामिल किया है, लेकिन अभी तक अपेक्षित काम नहीं हुआ है।
डा. जनक राज ने भांग की खेती को लेकर नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले एक समिति गठित की गई थी, जिसने देश के कई राज्यों का दौरा कर रिपोर्ट भी सौंपी, लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि यदि सरकार भांग की खेती को लेकर नीति बनाती है तो इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।
विधायक दीप राज ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गिफ्ट डीड के माध्यम से दी जाने वाली जमीन पर लगने वाली फीस को कम करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि अधिक फीस के कारण लोग जमीन देने में हिचकते हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
इसके अलावा विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने पिछली बरसात में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र के तीन प्रभावित लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन लोगों को घर बनाने के लिए विशेष पैकेज दिया जाए, ताकि वे फिर से अपना आशियाना बना सकें।
विधायक अनुराधा राणा ने एसएमसी शिक्षकों से जुड़ा मुद्दा उठाया, जबकि इंद्र सिंह ने स्कूलों में पदोन्नति से संबंधित समस्याओं को सदन के सामने रखा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

