home page

हिमाचल विधानसभा : शून्यकाल में विधायकों ने उठाया बंद बस रूटों का मामला

 | 
हिमाचल विधानसभा : शून्यकाल में विधायकों ने उठाया बंद बस रूटों का मामला


शिमला, 31 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में कोरोना काल के दौरान बंद किए गए बस रूट अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाए हैं। विधानसभा में सोमवार को शून्यकाल में विधायकों ने बंद बस रूटों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इन्हें जल्द बहाल करने की मांग की।

भोरंज के विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में कोरोना काल से विभिन्न रूटों पर तीन बसें बंद पड़ी हैं, जिन्हें अभी तक दोबारा शुरू नहीं किया गया है। बस सेवाएं बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

चौपाल के विधायक बलबीर वर्मा ने नेरवा परिवहन डिपो से जुड़ी समस्या सदन में उठाई। उन्होंने कहा कि पहले नेरवा डिपो का कामकाज नेरवा से ही संचालित होता था, लेकिन अब इसे शिमला के तारादेवी डिपो से संचालित किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि चौपाल विधानसभा क्षेत्र में करीब 22 बस रूट बंद हैं। इसका सबसे ज्यादा असर स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है।

इस पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार ने 3 हजार नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का निर्णय लिया है। इन बसों को चरणबद्ध तरीके से डीजल बसों के स्थान पर लगाया जाएगा। इसके बाद जो डीजल बसें उपलब्ध होंगी, उन्हें बंद पड़े रूटों पर चलाया जाएगा। सरकार का प्रयास रहेगा कि बंद बस रूटों को दोबारा संचालित किया जा सके।

बिजली कट से पेयजल योजनाएं प्रभावित, बिलासपुर विधायक ने उठाया मुद्दा

बिलासपुर के विधायक त्रिलोक जम्वाल ने शून्यकाल में क्षेत्र में लगातार लग रहे बिजली कट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से पेयजल परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं और लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कट का असर रोजमर्रा के कामकाज के साथ-साथ ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने मामले को संबंधित विभाग को भेजने की बात कही।

सफेदा फसल के लिए नई अनुमति प्रक्रिया पर सत्ती ने घेरा सरकार को

ऊना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने सफेदा की फसल को लेकर प्रदेश सरकार की नई अनुमति प्रक्रिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पांवटा, नालागढ़ और नूरपुर सफेदा उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं। नए नियमों के तहत किसानों को पंचायत, पटवारी, बीओडी और वन विभाग के स्तर पर अनुमति लेनी पड़ती है। इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन के साथ फोटो भी अपलोड करना होता है।

सत्ती ने कहा कि पहले आवेदन के लिए कोई शुल्क नहीं था, लेकिन अब प्रति ट्रक 500 रुपये और प्रति पेड़ 90 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। इससे किसान पर कुल खर्च करीब तीन हजार रुपये से अधिक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य पंजाब में ऐसी औपचारिकताएं नहीं हैं। सरकार से प्रक्रिया सरल करने की मांग करते हुए उन्होंने फायर सीजन में भी सफेदा की फसल काटने की अनुमति देने की मांग की। उनका तर्क था कि सफेदा की फसल वाले खेतों में आग लगने का खतरा नहीं है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा