home page

हिमाचल विधानसभा में विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित, विश्वविद्यालयों में लोकसेवा आयोग से होगी सहायक आचार्य की भर्ती

 | 
हिमाचल विधानसभा में विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पारित, विश्वविद्यालयों में लोकसेवा आयोग से होगी सहायक आचार्य की भर्ती


शिमला, 02 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को विश्वविद्यालयों में भर्ती और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े संशोधन विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। प्रदेश के छह विश्वविद्यालय इस संशोधन विधेयक के दायरे में आएंगे।

इस संशोधन विधेयक को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्षी दल भाजपा ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में दखल बताते हुए विरोध किया, जबकि सरकार ने कहा कि संशोधन से भर्ती और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी तथा योग्य युवाओं को मेरिट के आधार पर अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को यह संशोधन विधेयक सदन में पेश किया था। बुधवार को चर्चा के बाद इसे पारित किया गया। संशोधन के तहत विश्वविद्यालयों में सहायक आचार्यों की भर्ती लोक सेवा आयोग के माध्यम से करने का प्रावधान किया गया है। गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती राज्य चयन आयोग करेगा। विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की अध्यक्षता प्रदेश सरकार के वित्त सचिव करेंगे।

मुख्यमंत्री ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार यह संशोधन विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही लाने के लिए लाई है। उन्होंने कहा कि इसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन नहीं किया गया है और विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 34 पहले की तरह बनी रहेगी।

सुक्खू ने स्पष्ट किया कि केवल सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) की नियुक्ति लोक सेवा आयोग के माध्यम से होगी। सह आचार्य (एसोसिएट प्रोफेसर) और आचार्य (प्रोफेसर) की नियुक्तियां विश्वविद्यालय अपने स्तर पर करेगा। उन्होंने कहा कि मेडिकल विश्वविद्यालय में डॉक्टरों और प्रवक्ताओं की नियुक्तियां भी आयोग के माध्यम से होती हैं। ऐसे में राज्य के छह विश्वविद्यालयों में सहायक आचार्यों की नियुक्ति आयोग के माध्यम से किए जाने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय जवाबदेही के लिए वित्त समिति का अध्यक्ष वित्त सचिव होगा और समिति की रिपोर्ट विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद को दी जाएगी। कार्यकारी परिषद की अध्यक्षता कुलपति करेंगे। उन्होंने कहा कि संशोधन से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती होने से नेट और सेट पास युवाओं को मेरिट के आधार पर नौकरी पाने का अवसर मिलेगा और सिफारिश की गुंजाइश कम होगी। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती और वित्तीय मामलों में पारदर्शिता चाहती है। सुक्खू ने विधेयक का विरोध करने वालों पर प्रदेश के युवाओं के हितों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि यह फैसला जनता के हित में और व्यवस्था परिवर्तन के तहत लिया गया है। सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है। पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के खिलाफ कोई सबूत है तो सरकार उसकी जांच करवाएगी।

मुख्यमंत्री ने निजी विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं को लेकर भी भविष्य में विधेयक लाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि एक ही जगह से सभी परीक्षाएं आयोजित कराने की व्यवस्था पर आगे विचार किया जाएगा।

विधेयक में संशोधन का विरोध करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप कर रही है और उन्हें सरकारी विभाग की तरह चलाना चाहती है। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि इस विधेयक से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म होगी।

भाजपा विधायक विपिन परमार ने इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया। वहीं, त्रिलोक जमबाल ने कहा कि संविधान में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता का प्रावधान है और कांग्रेस संविधान की दुहाई देती है, लेकिन इस संशोधन के माध्यम से उसी व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।

तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह भविष्य की दिशा तय करेगा। धर्माणी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता के नाम पर व्यवस्था का दुरुपयोग हुआ है और मेरिट को दरकिनार कर राजनीतिक आधार पर नियुक्तियां होती रही हैं। उन्होंने कहा कि संशोधन के बाद मेरिट की अनदेखी नहीं होगी।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार ने भी विधेयक का समर्थन किया।

बुधवार को सदन में हिमाचल प्रदेश माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक और शिमला की सड़कों के उपयोग और पैदल चलने वालों से संबंधित संशोधन विधेयक भी ध्वनि मत से पारित किए गए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा