हिमाचल विधानसभा में 40,461 करोड़ का अनुपूरक बजट पारित, 2025-26 का कुल बजट आकार बढ़ा
शिमला, 19 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2025-26 का बजट अब बढ़कर लगभग 98,975 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। गुरुवार को विधानसभा के बजट सत्र में 40,461.95 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित होने के बाद कुल बजट में बड़ा इजाफा हुआ है। इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बीते साल 17 मार्च 2025 को 58,514 करोड़ रुपये का मूल बजट पेश किया था।
मुख्यमंत्री ने आज सदन में यह अनुपूरक बजट पेश किया और इसके लिए हिमाचल प्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 भी रखा, जिसे ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई। सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त बजट से राज्य की चल रही योजनाओं, वेतन-भत्तों और विकास कार्यों के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस अनुपूरक बजट में सबसे बड़ा हिस्सा राज्य की अपनी योजनाओं के लिए रखा गया है। करीब 36,374 करोड़ रुपये राज्य स्कीमों पर खर्च होंगे, जबकि 4,087 करोड़ रुपये केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए तय किए गए हैं। राज्य योजनाओं में भी सबसे ज्यादा 26,194 करोड़ रुपये वेतन, भत्तों और ओवरड्राफ्ट जैसी वित्तीय जरूरतों के लिए रखे गए हैं, जो सरकार के खर्च का बड़ा हिस्सा दिखाता है।
ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी सरकार ने बड़ा प्रावधान किया है। करीब 4,150 करोड़ रुपये बिजली उत्पादन बढ़ाने, ट्रांसफार्मरों की मरम्मत और बिजली बोर्ड को दी गई वित्तीय मदद को इक्विटी में बदलने के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं से राहत के लिए 818 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पहाड़ी राज्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पेयजल और सीवरेज योजनाओं के लिए 785 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 657 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इस राशि से हिमकेयर और सहारा जैसी योजनाओं को जारी रखने के साथ शिमला, टांडा, हमीरपुर, नेरचौक और चमियाणा के मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा, नई लैब और उपकरणों की खरीद जैसे काम होंगे।
शहरी और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। करीब 555 करोड़ रुपये से शिमला की सब्जी मंडी, हमीरपुर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बस अड्डा और खलीनी में फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे। वहीं सड़कों और पुलों के निर्माण व रखरखाव के लिए 453 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
परिवहन क्षेत्र में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को 443 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी, जिससे यात्रियों को दी जा रही किराया रियायतों की भरपाई की जा सके। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग ढांचे को भी मजबूत करने की योजना है।
ग्रामीण क्षेत्रों और शिक्षा ढांचे को भी बजट में जगह दी गई है। स्कूल भवनों, कॉलेजों और आईटीआई संस्थानों के निर्माण के लिए 244 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय और सामाजिक योजनाओं के लिए 221 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
आपदा प्रबंधन और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए भी बजट में राशि रखी गई है। मंडी में एनडीआरएफ बटालियन के लिए सड़क और उपकरणों पर खर्च, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी घंडल में ढांचे के विस्तार और विभिन्न सरकारी भवनों के निर्माण के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं में भी बड़ी राशि शामिल है। एनडीआरएफ से आपदा प्रबंधन के लिए 2,453 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए 688 करोड़ रुपये और रेणुकाजी बांध विस्थापितों के मुआवजे के लिए 352 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। इसके अलावा मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, कृषि सिंचाई योजना और आयुष मिशन जैसी योजनाओं के लिए भी बजट तय किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

