हिमाचल विधानसभा : शून्यकाल में उठे किसानों की गेहूं खरीद, सड़कों की गुणवत्ता और पावर प्रोजेक्ट के मुद्दा
शिमला, 27 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शून्यकाल के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े तीन अहम मुद्दे विधायकों ने उठाए। इनमें किसानों से गेहूं की खरीद न होने, राष्ट्रीय राजमार्ग की खराब गुणवत्ता और एक पावर प्रोजेक्ट से पानी की संभावित कमी जैसे विषय शामिल रहे।
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने श्री नयना देवी जी विधानसभा क्षेत्र के तहत मंझारी अनाज मंडी में किसानों से गेहूं की खरीद नहीं होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के किसान अपनी फसल बेचने में परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब और नंगल में भी हिमाचल के किसानों की गेहूं की खरीद नहीं की जा रही है। इस कारण किसानों को दिक्कतें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ किसान अपने रिश्तेदारों के नाम पर पड़ोसी राज्य में गेहूं बेच देते हैं, लेकिन अधिकांश किसान ऐसा नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में करीब 1,000 हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है, इसलिए सरकार को यहां खरीद की व्यवस्था करनी चाहिए।
वहीं विधायक हरदीप सिंह बाबा ने नालागढ़ क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग की टारिंग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सड़क बनने के करीब तीन महीने के भीतर ही टारिंग उखड़ गई है, जिससे वाहनों की आवाजाही में परेशानी हो रही है। उन्होंने सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही ठीक नहीं है और संबंधित एजेंसियों को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
इसके अलावा विधायक लोकेंद्र कुमार ने बागीपुल क्षेत्र में बन रहे एक मेगावाट क्षमता के पावर प्रोजेक्ट का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि वे परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसके कारण आसपास के करीब तीन गांवों के 300 से 400 लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना स्थल तक पहुंच के लिए बिना वन स्वीकृति (एफसीए) के सड़क निकाली जा रही है। इसके अलावा क्षेत्र में चल रहे कई घराट भी इस परियोजना के कारण प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि प्रोजेक्ट के लिए पानी का उपयोग किया जाएगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

