रोजगार के मुद्दे पर सदन में तनातनी, जवाब से असंतुष्ट भाजपा ने बाहर आकर की नारेबाजी
शिमला, 25 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन मंगलवार को बेरोजगारी और आउटसोर्स भर्तियों के मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष की ओर से उठाए गए सवाल पर मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट भाजपा विधायक सदन से बाहर आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
सदन के बाहर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर प्रदेश के युवाओं के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस युवाओं से रोजगार का वादा करके सत्ता में आई थी, लेकिन सरकार का करीब चार साल का कार्यकाल पूरा होने को है और युवाओं को रोजगार नहीं मिला है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने हर साल एक लाख नौकरियां देने का वादा किया था। उनके अनुसार, सरकार ने युवाओं के वोट लेकर सत्ता हासिल की, लेकिन आज प्रदेश के युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, फिर भी रोजगार के वादे पूरे नहीं हुए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष ने सदन में रोजगार से जुड़ा सवाल उठाया था, लेकिन उन्हें सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उनके अनुसार, जवाब को इधर-उधर ले जाया गया और उसमें राजनीतिक बातें अधिक की गईं।
जयराम ठाकुर ने आउटसोर्स भर्तियों को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पदाधिकारियों के नाम पर आउटसोर्स कंपनियां लगातार पंजीकृत की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने खुले मंच से 600 नौकरियां देने की बात कही थी। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें रोकने का काम किया है।
इसी मुद्दे पर पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रदेश में आउटसोर्स के माध्यम से हो रही भर्तियों को लेकर सदन में सवाल पूछा था, लेकिन सदन के भीतर उनकी आवाज को दबाया गया।
बिक्रम ठाकुर ने सवाल उठाया कि आउटसोर्स के माध्यम से नौकरियां किस मेरिट के आधार पर दी जा रही हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या इन नौकरियों के लिए पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने विजिलेंस जांच को लेकर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या विजिलेंस केवल विपक्ष के नेताओं की जांच करेगी या आउटसोर्स भर्तियों की भी जांच होगी।
पूर्व मंत्री ने कहा कि उन्होंने आउटसोर्स भर्तियों के मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की मांग की है। उनका कहना था कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

