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हिमाचल की टैक्सियों और एलएमवी पर टोल टैक्स नहीं लगेगा, सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए पास पर होगा विचार: मुख्यमंत्री

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हिमाचल की टैक्सियों और एलएमवी पर टोल टैक्स नहीं लगेगा, सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए पास पर होगा विचार: मुख्यमंत्री


शिमला, 25 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की टैक्सियों और एलएमवी (हल्के मोटर वाहनों) पर कोई टोल टैक्स नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने यह जानकारी विधायक राकेश जम्वाल, सुखराम चौधरी और राकेश कालिया के संयुक्त सवाल के जवाब में दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे लोग, जिन्हें रोजाना काम या अन्य कारणों से राज्य की सीमाओं से होकर आना-जाना पड़ता है, उनके लिए पास जारी करने के मुद्दे पर कैबिनेट में सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो बाहरी लोग नियमित रूप से हिमाचल में आते-जाते हैं, यदि वे अपने वाहन हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत करवाते हैं तो उन्हें टोल से संबंधित राहत मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि जहां राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राज्य सरकार के टोल बैरियर साथ-साथ स्थित हैं, उन्हें एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा ताकि लोगों को सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य के टोल बैरियर को फास्टैग प्रणाली से जोड़ दिया है और टोल टैक्स में उतनी वृद्धि नहीं की गई है, जितनी चर्चा हो रही है।

इस दौरान अनुपूरक सवाल के माध्यम से विधायक राकेश कालिया और सुखराम चौधरी ने कहा कि सीमा से सटे गांवों के लोग व्यापार और उद्योगों में काम करने के लिए रोजाना आवाजाही करते हैं, इसलिए उन्हें पास की सुविधा दी जानी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस सुझाव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी से सरकार को वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 54 करोड़ रुपये अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि प्रवेश शुल्क में वृद्धि से सरकार को कुल मिलाकर लगभग 228 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रवेश शुल्क बढ़ाने से पर्यटन उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका अभी आकलन नहीं किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस फैसले से प्रदेश में महंगाई बढ़ने या आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना बहुत कम है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा टोल नीति के तहत तय की गई तिमाही और सालाना दरें केवल उन वाहनों पर लागू होंगी, जिनके मालिक हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं और जो किसी टोल बैरियर के 5 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। ऐसे वाहन मालिकों को यह सुविधा तभी मिलेगी, जब वे संबंधित एसडीएम या तहसीलदार से प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे, जिसमें यह प्रमाणित होगा कि उनका निवास टोल बैरियर से 5 किलोमीटर के दायरे में ही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा