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हिमाचल में नदियों की ड्रेजिंग और माइनिंग के लिए बनेगा अलग विभाग, सरकार लाएगी नई डेजिंग नीति: सुक्खू

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हिमाचल में नदियों की ड्रेजिंग और माइनिंग के लिए बनेगा अलग विभाग, सरकार लाएगी नई डेजिंग नीति: सुक्खू


शिमला, 03 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान गुरुवार को ब्यास नदी और प्रदेश की अन्य नदियों में ड्रेजिंग व माइनिंग का मुद्दा छाया रहा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार माइनिंग के लिए अलग विभाग बनाने और नदियों से जमा सामग्री हटाने के लिए नई ड्रेजिंग नीति लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए दूसरे राज्यों की व्यवस्थाओं से भी इनपुट लिया जाएगा।

बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी के सवाल के जवाब में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में पांच प्रमुख नदियां हैं। इनकी ड्रेजिंग और डिलिस्टिंग व्यवस्थित तरीके से की जाए तो राज्य को दो से तीन हजार करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार के साथ भी नियमों में बदलाव को लेकर चर्चा की जा रही है।

सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2023 में आई आपदा के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नदी में जमा सामग्री हटाने के लिए ड्रेजिंग कराने का सुझाव दिया था। इसके बाद उद्योग विभाग से ड्रेजिंग की अनुमति दी गई। सरकार के पास ड्रेजिंग के बाद सामग्री निकालने का अधिकार था, लेकिन माइनिंग की अनुमति नहीं मिली और अगली बरसात में काफी सामग्री बह गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके बाद केंद्र के साथ चर्चा में कुल्लू की तीन साइट चिन्हित की गईं। ड्रेजिंग की अनुमति मिलने के बाद ठेकेदार ने माइनिंग विभाग में एम-फॉर्म के लिए आवेदन किया था और उसे डब्ल्यू-फॉर्म मिले थे। उन्होंने कहा कि हाल की एक बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ड्रेजिंग के दौरान रॉयल्टी नहीं लेने का सुझाव दिया, लेकिन राज्य सरकार का मानना है कि रॉयल्टी उसका अधिकार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नदियों में ड्रेजिंग और माइनिंग की अलग-अलग व्यवस्था को व्यवस्थित करना चाहती है। बीबीएमबी और पौंग जैसे बांधों की डिसिल्टिंग के लिए लगाए गए कुछ टेंडर बाद में रद्द किए गए और वन निगम के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि नदियों में ड्रेजिंग का काम वन निगम के जरिए किया जा रहा है और इससे राज्य को 100 से 200 करोड़ रुपये तक की आय हो रही है। उन्होंने कहा कि माइनिंग से फिलहाल इतनी आय नहीं हो रही है।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया कि ड्रेजिंग और माइनिंग अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने कहा कि ड्रेजिंग के लिए सरकार नई नीति बनाएगी। अदालत के फैसलों के तहत ड्रेजिंग से निकली सामग्री की नीलामी की जा सकती है, सीधे बिक्री नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या वन संरक्षण अधिनियम के तहत मंजूरी मिलने की है।

चौहान ने बताया कि कुल्लू में 44 साइटों की नीलामी की गई थी, लेकिन वन मंजूरी नहीं मिलने के कारण डीएफओ ने कई जगह सामग्री उठाने की अनुमति नहीं दी। पूरे हिमाचल में करीब 324 साइट हैं, जिनमें अभी तक केवल पांच-छह जगहों पर वन मंजूरी मिल पाई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने इस समस्या के समाधान के लिए संयुक्त बैठक बुलाई है।

उद्योग मंत्री ने बताया कि वर्ष 2018 में कुल्लू में ब्यास नदी के 19 स्थलों की नीलामी की गई थी। वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के कारण जरूरी मंजूरी नहीं मिलने से इनमें से 15 स्थल निरस्त कर दिए गए। चार स्थलों के सफल बोलीदाता अभी मंजूरी की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग कुल्लू में ब्यास नदी के तीन स्थलों पर ड्रेजिंग कर रहा है, जबकि बंजार क्षेत्र में ड्रेजिंग और माइनिंग के सात स्थल चिन्हित किए गए हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2023 की बाढ़ के बाद वर्ष 2024 में मनाली उपमंडल में छह स्थानों पर करीब 1.22 करोड़ रुपये, कुल्लू में करीब 5.72 करोड़ रुपये और बंजार में करीब 2.98 करोड़ रुपये ड्रेजिंग पर खर्च किए गए। वर्ष 2024 में ड्रेजिंग के लिए करीब 2.24 करोड़ रुपये की नीलामी हुई थी, जिसमें करीब 50 लाख रुपये प्राप्त हुए। वर्ष 2025 में दोबारा बारिश से जमा सामग्री बह गई।

बंजार के भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने ड्रेजिंग और माइनिंग से सरकार को होने वाली आय और निकाली गई सामग्री की स्थिति पर सवाल उठाया। भाजपा विधायक विक्रम ठाकुर ने पूछा कि माइनिंग का काम वन निगम को क्यों दिया गया और कितने एम-फॉर्म जारी हुए।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने ब्यास में रात के समय मशीनों से सामग्री निकाले जाने का आरोप लगाते हुए पूछा कि निकाली गई सामग्री कहां गई और सरकार को इससे कितना राजस्व मिला। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए इसमें घोटाले की आशंका जताई और पूरी जानकारी सदन में रखने की मांग की।

सुंदरनगर के विधायक राकेश जंबाल ने ड्रेजिंग से निकलने वाली सिल्ट के निपटारे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सुकेत खड्ड में सिल्ट डालने से बल्ह घाटी में परेशानी पैदा होती है।

इस पर उद्योग मंत्री ने कहा कि डैम साइटों पर लगातार सिल्ट जमा हो रही है और ड्रेजिंग से निकलने वाली पूरी सामग्री उपयोगी नहीं होती। उन्होंने कहा कि हाइड्रो कंपनियों को अपने स्तर पर सामग्री निकालने और उसके निपटारे की व्यवस्था करनी होगी।

उद्योग मंत्री ने कहा कि हिमाचल में माइनिंग से रॉयल्टी की आय वर्ष 2024-25 में 356 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछली सरकार के समय यह करीब 240 करोड़ रुपये थी। उन्होंने कहा कि नई माइनिंग नीति के बाद राजस्व में वृद्धि हुई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा