गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण साल के अंत तक पूरा होगा : मुख्यमंत्री
शिमला, 02 अप्रैल (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार कांगड़ा जिले के गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने बताया कि सरकार अब तक प्रभावित परिवारों को लगभग 1960 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दे चुकी है, जबकि करीब 1500 करोड़ रुपये की राशि अभी दी जानी बाकी है। कुल मिलाकर इस परियोजना के लिए लगभग 3500 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री वीरवार को विधानसभा में विधायक पवन काजल के मूल प्रश्न तथा नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सुधीर शर्मा, केवल सिंह पठानिया और विपिन सिंह परमार के अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर में यह जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नियमों के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसे तय समय में पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में गग्गल हवाई अड्डे की लंबाई 1370 मीटर है, जिसे विस्तार के बाद बढ़ाकर 3110 मीटर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे बड़े विमानों की आवाजाही संभव होगी और कांगड़ा क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार पहले ही कांगड़ा को पर्यटन राजधानी का दर्जा दे चुकी है और हवाई अड्डे का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया इस हवाई अड्डे के विस्तार का निर्माण कार्य नहीं करती है, तो राज्य सरकार पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड सहित अन्य विकल्पों पर भी विचार करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को हर हाल में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वह दो बार दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मिल चुके हैं और प्रधानमंत्री से भी इस विषय पर चर्चा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार राज्य को आरडीजी (रीजनल डेवलपमेंट गाइडेंस) देती है तो प्रदेश सरकार बल्क एयरपोर्ट बनाने के लिए भी तैयार है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में हवाई सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके तहत हर जिले में हेलीपोर्ट बनाने की योजना पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि पालमपुर, चंबा और हमीरपुर में हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य जून महीने तक पूरा होने की संभावना है। इसके अलावा दूसरे चरण में ऊना, सिरमौर और सोलन जिलों में भी हेलीपोर्ट बनाए जाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि शिमला से दिल्ली के बीच हवाई सेवा को जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने 110 करोड़ रुपये वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के रूप में दिए हैं। सरकार दिल्ली-शिमला-अमृतसर हवाई सेवा शुरू करने की दिशा में भी प्रयास कर रही है। हालांकि इस सेवा को शुरू करने के लिए संबंधित कंपनी से बातचीत की गई है, लेकिन कंपनी के पास फिलहाल पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने के लिए पर्याप्त पायलट उपलब्ध नहीं हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

