home page

तीन साल में हिमाचल में 2411 औद्योगिक इकाइयां स्थापित, 88 बंद

 | 
तीन साल में हिमाचल में 2411 औद्योगिक इकाइयां स्थापित, 88 बंद


शिमला, 25 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान उद्योग मंत्री बुधवार को उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में 2411 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुई हैं, जबकि इसी अवधि में 88 औद्योगिक इकाइयां बंद भी हुई हैं। उन्होंने यह जानकारी विधायक बिक्रम सिंह के सवाल के जवाब में दी।

उद्योग मंत्री ने बताया कि 30 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का ध्यान नई इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ निवेश के माहौल को मजबूत करने पर भी है, ताकि अधिक से अधिक उद्योग राज्य में स्थापित हो सकें।

मंत्री ने आगे बताया कि औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के रैम्प कार्यक्रम के तहत एक प्रतिनिधिमंडल जापान, हांगकांग और वियतनाम के दौरे पर गया था। इस प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता उन्होंने स्वयं की थी। इस दौरे में अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग आर.डी. नजीम, उद्योग निदेशक डॉ. यूनुस, अतिरिक्त निदेशक तिलक राज शर्मा, संयुक्त निदेशक अंशुल धिमान, संयुक्त निदेशक अनिल ठाकुर, तीन विधायक और सलाहकार सुमित सागर डोकरा भी शामिल थे।

उन्होंने बताया कि इस एक्सपोजर विजिट पर कुल 2 करोड़ 4 लाख 22 हजार 830 रुपये खर्च किए गए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह दौरा केंद्र प्रायोजित योजना के तहत किया गया था और इसमें प्रदेश सरकार की राशि खर्च नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि इस एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य सीधे तौर पर निवेश आकर्षित करना नहीं था, अन्य देशों की औद्योगिक व्यवस्थाओं और अनुभवों का अध्ययन करना था, जिससे प्रदेश में औद्योगिक विकास को मजबूत किया जा सके।

उद्योग मंत्री ने बताया कि एमएसएमई के तहत हिमाचल प्रदेश को विभिन्न मदों में कुल 105 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इनमें से एक्सपोजर विजिट के लिए 5 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जिनमें से लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

उन्होंने कहा कि इस दौरे के बाद राजधानी शिमला के रिज मैदान पर एमएसएमई फेस्ट का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम के दौरान लगी प्रदर्शनी में एक स्टॉल पर 2500 हस्तनिर्मित शॉल प्रदर्शित की गईं, जिन्हें गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया। इसी कार्यक्रम के दौरान 250 सीईओ का सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें 10 हजार करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए गए। इनमें से 2500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को सिंगल विंडो क्लीयरेंस भी प्रदान की जा चुकी है।

उद्योग मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में जब भी इस तरह का कोई प्रतिनिधिमंडल विदेश दौरे पर भेजा जाएगा, तो उसमें पूर्व उद्योग मंत्री को भी शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा