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सभी पात्र कर्मचारियों को मिलेगा ओपीएस, 2,229 करोड़ के लंबित वेतन-पेंशन भुगतान किए : मुख्यमंत्री सुक्खू

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सभी पात्र कर्मचारियों को मिलेगा ओपीएस, 2,229 करोड़ के लंबित वेतन-पेंशन भुगतान किए : मुख्यमंत्री सुक्खू


शिमला, 03 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा है कि प्रदेश के सभी पात्र सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों के प्रति संवेदनशील है और लंबित वेतन, पेंशन तथा दूसरे वित्तीय लाभों का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक कर्मचारियों और पेंशनरों को करीब 2,229 करोड़ रुपये के लंबित वेतन और पेंशन संबंधी एरियर का भुगतान किया जा चुका है।

करसोग के विधायक दीपराज के पेंशनरों से जुड़े मूल सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सरकारी विभागों में करीब एक लाख 90 हजार पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर हैं। उन्होंने कहा कि पेंशनरों को हर महीने की पहली तारीख को पेंशन दी जा रही है। प्रदेश की कठिन आर्थिक स्थिति के बावजूद सरकार लंबित वित्तीय लाभों का भुगतान अपनी क्षमता के अनुसार कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वर्तमान सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब प्रदेश पर कर्मचारियों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां थीं और राज्य गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। इसके बावजूद सरकार ने स्थिति का सामना किया और धीरे-धीरे कर्मचारियों तथा पेंशनरों के लंबित भुगतान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों के लंबित एरियर का भुगतान कर दिया गया है। यदि एक-दो मामले अभी बाकी हैं तो विपक्ष सरकार को इसकी जानकारी दे सकता है।

उन्होंने कहा कि 58 से 67 वर्ष की आयु के उन कर्मचारियों के लंबित लाभों का भी भुगतान किया गया है, जो 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 की अवधि में सेवानिवृत्त हुए थे। मुख्यमंत्री के अनुसार क्लास-वन और क्लास-टू के ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 15 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बिजली बोर्ड और

एचआरटीसी कर्मचारियों को ओपीएस दिए जाने के सवाल पर कहा कि प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना लागू करने का फैसला सरकार ने सियासी लाभ के लिए नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि यह सरकार का पहला कैबिनेट फैसला था और इसका उद्देश्य कर्मचारियों के बुढ़ापे और भविष्य को सुरक्षित करना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओपीएस से जुड़े यदि कुछ मामले अभी बाकी हैं तो उन्हें भी योजना का लाभ दिया जाएगा।

डॉक्टर जनक राज के अनुपूरक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने उन कर्मचारियों का भी जिक्र किया जो पहले नई पेंशन व्यवस्था में थे और ओपीएस के लिए कुछ राशि जमा करा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सभी सरकारी कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील है और पात्र कर्मचारियों के लंबित मामलों को भी देखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने लंबित भुगतान में देरी के लिए राज्य की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) में कटौती का भी राज्य को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में करीब 47 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिले, जबकि वर्तमान सरकार को अब तक करीब 17 हजार करोड़ रुपये ही मिले हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार आरडीजी में कमी से राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि यदि केंद्र से आपदा के दौरान अपेक्षित मदद मिलती, प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता मिलती और आरडीजी में कटौती नहीं होती तो सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के अन्य लंबित एरियर का भी भुगतान कर सकती थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने आपदा के दौरान अपने बजट से करीब 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। केंद्र से मिलने वाली राशि मिलने पर उसका इस्तेमाल बुनियादी ढांचे पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के समय यह इंतजार नहीं किया जा सकता कि दिल्ली से पैसा कब आएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने दो बड़ी आपदाओं का सामना किया है और राज्य सरकार ने अपने स्तर पर राहत और पुनर्निर्माण के लिए काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बैंक और नीति आयोग सहित कई स्तरों पर राज्य के काम की सराहना हुई है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनकी ओर से भी सरकार के काम की तारीफ की गई है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के जवाब पर अनुपूरक सवाल करते हुए सरकार की कर्मचारी हितैषी होने के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारी और पेंशनर हितैषी है तो प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर कर्मचारी और पेंशनर धरने और प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। उन्होंने बिजली बोर्ड कर्मचारियों के ओपीएस को लेकर किए गए प्रदर्शन का भी जिक्र किया और पूछा कि यदि सरकार ने पुरानी पेंशन योजना लागू कर दी है तो बिजली बोर्ड के कर्मचारी इसके लिए आंदोलन क्यों कर रहे हैं।

जयराम ठाकुर ने आरडीजी को लेकर मुख्यमंत्री के तर्क पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने का यह पहला साल है और इससे पहले तीन साल तक सरकार को आरडीजी मिलती रही। ऐसे में कर्मचारियों की देनदारियों का भुगतान पहले क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने आपदा के लिए मिलने वाली केंद्र की राशि को वेतन और एरियर के भुगतान से जोड़ने पर भी सवाल उठाया। जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा के लिए मिलने वाला पैसा प्रभावित लोगों और पुनर्निर्माण के काम के लिए होता है, उसे वेतन या पेंशन के भुगतान में खर्च नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने जवाब में कहा कि लोकतंत्र में कर्मचारियों को धरना और प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार उनकी बात सुन रही है। मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर छठे वेतन आयोग के भुगतान में भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उस समय करीब 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया था और बाकी भुगतान चुनाव के बाद करने की बात कही गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार प्रदेश पर करीब 76,700 करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों के हित में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं, जनता की सेवा के लिए काम करती है। उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल को तीन साल आठ महीने 23 दिन हुए हैं और आने वाले समय में व्यवस्था में और सुधार किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा