चेस्टर हिल मामले की हाईकोर्ट जज की निगरानी में जांच नहीं होगी : हिमाचल सरकार
शिमला, 22 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने चर्चित चेस्टर हिल मामले की जांच हाईकोर्ट के किसी जज की निगरानी में करवाने से इनकार किया है। सरकार ने कहा है कि मामले में हिमाचल प्रदेश काश्तकारी और भू-सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के कथित उल्लंघन से जुड़ी कार्रवाई कानून के तहत जिला समाहर्ता सोलन की अदालत में चल रही है। यह जानकारी राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शनिवार को विधानसभा में धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के सवाल के लिखित जवाब में दी।
सुधीर शर्मा ने सरकार से चेस्टर हिल से जुड़ी परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। उन्होंने यह भी सवाल किया था कि क्या इस मामले की जांच प्रदेश हाईकोर्ट के किसी जज की निगरानी में करवाई जाएगी।
राजस्व मंत्री ने बताया कि सोलन जिले में चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 आवासीय कॉलोनी परियोजनाओं से संबंधित शिकायतें विभाग को मिली थीं। इन शिकायतों में बेनामी लेन-देन और हिमाचल प्रदेश काश्तकारी एवं भू-सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के उल्लंघन के आरोप शामिल थे।
उन्होंने बताया कि सरकार ने इस मामले में सोलन के उपायुक्त को जांच करने और नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उपायुक्त सोलन ने मामले की जांच एसडीएम सोलन के माध्यम से करवाई।
राजस्व मंत्री के अनुसार एसडीएम सोलन की ओर से सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर धारा 118 के उल्लंघन का मामला जिला समाहर्ता सोलन की अदालत में दर्ज किया गया। इस मामले की सुनवाई फिलहाल चल रही है।
मंत्री ने कहा कि धारा 118 के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों की जांच और उन पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए जिला समाहर्ता सक्षम अधिकारी हैं। ऐसे मामलों में मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि चेस्टर हिल मामले की जांच हाईकोर्ट के किसी जज की निगरानी में नहीं करवाई जाएगी। फिलहाल मामला जिला समाहर्ता सोलन की अदालत में विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

