विधानसभा सत्र से पहले शिक्षा विभाग ने मांगा 10 साल का हिसाब, रिक्त पदों, भर्तियों और तबादलों की जुटाई जा रही जानकारी
शिमला, 07 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले उच्च शिक्षा विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग ने सरकारी कॉलेजों और उच्च शिक्षा उपनिदेशकों से पिछले करीब दस वर्षों का रिकॉर्ड मांगा है। इसमें शिक्षकों और कर्मचारियों के खाली पदों, भर्तियों, तबादलों, पदोन्नति और नियमितीकरण की जानकारी शामिल है। विभाग को जनवरी 2017 से एक नवंबर 2026 तक का वर्षवार ब्योरा देना होगा। इसके लिए वर्ष 2017 से 2022 और एक जनवरी 2023 से एक नवंबर 2026 तक की जानकारी अलग-अलग मांगी गई है।
दरअसल, विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 से 21 नवंबर तक प्रस्तावित है। इसमें शिक्षा विभाग से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए यह जानकारी जुटाई जा रही है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपलों और उच्च शिक्षा उपनिदेशकों को समय पर रिकॉर्ड भेजने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों के स्वीकृत पदों, भरे हुए पदों और खाली पदों की जानकारी मांगी है। इसमें सामान्य, कठिन और जनजातीय क्षेत्रों के कॉलेजों का ब्योरा अलग-अलग देना होगा।
विभाग को यह भी बताना होगा कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग, राज्य चयन आयोग और विभाग के माध्यम से हर साल कितनी भर्तियां हुईं। कठिन और उप-कैडर क्षेत्रों में कितनी नियुक्तियां की गईं, कितने कर्मचारियों के तबादले हुए और कितने कर्मचारियों को पदोन्नति मिली, इसका भी रिकॉर्ड देना होगा। नियमित किए गए कर्मचारियों की संख्या और उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया की जानकारी भी मांगी गई है। इसके अलावा अनुबंध पर काम कर रहे कर्मचारियों की जिला और श्रेणीवार संख्या बतानी होगी। भर्ती के लिए आयोगों और अन्य माध्यमों को भेजे गए पदों, मिली सिफारिशों और नियुक्तियों का विवरण भी देना होगा।
कॉलेजों के निर्माण कार्यों और छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी भी मांगी
उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में चल रहे निर्माण कार्यों और उन पर खर्च हुए बजट का ब्योरा भी मांगा है। केंद्र और राज्य सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं, उनमें मिलने वाली राशि और केंद्र प्रायोजित योजनाओं की मौजूदा स्थिति की जानकारी देनी होगी। इसके साथ वर्षवार, जिला और विधानसभा क्षेत्र के अनुसार सरकारी कॉलेजों की सूची तैयार करने को कहा गया है। पीटीए शिक्षकों की विषयवार और श्रेणीवार संख्या के साथ निजी शिक्षण संस्थानों और वहां चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों का रिकॉर्ड भी मांगा गया है। विभाग को हाल में शुरू की गई योजनाओं और लंबित समस्याओं की जानकारी भी देनी होगी।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह पूरा रिकॉर्ड शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब तैयार करने के लिए जुटाया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

