भ्रष्टाचार और माइनिंग माफिया पर कार्रवाई तेज करेंगे: सुक्खू
शिमला, 27 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश में अपराध और अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और माइनिंग माफिया के खिलाफ सख्ती और तेजी से कार्रवाई कर रही है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा। इस दौरान पुलिस एवं संबंधित विभागों से जुड़े कटौती प्रस्ताव को सदन में ध्वनिमत से गिरा दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक संपदा की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। अगर कोई व्यक्ति या समूह प्रदेश की संपदा को नुकसान पहुंचाएगा या अवैध गतिविधियों में शामिल पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्तव्यनिष्ठा और पारदर्शिता के साथ काम करने का संकल्प लिया है और आने वाले समय में कई बड़े खुलासे भी सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का किसी से व्यक्तिगत द्वेष नहीं है, लेकिन जो भी माफिया गतिविधियों में शामिल होगा, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को बेहतर बताते हुए कहा कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच दर्ज अपराधों की संख्या पिछली सरकार के समय की तुलना में कम रही है। उनके अनुसार कुल अपराधों में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं पुलिस की सक्रियता के कारण मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में 39 प्रतिशत अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जो कार्रवाई की तेजी को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि पारदर्शी शासन देना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले खनन माफिया टैक्स चोरी कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा था, लेकिन अब ऐसे मामलों पर लगाम लगाई जा रही है। उन्होंने बताया कि ऊना क्षेत्र में शाम सात बजे के बाद खनन गतिविधियों पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए गए हैं और अवैध खनन में शामिल वाहनों को पकड़ने की कार्रवाई भी जारी है।
मुख्यमंत्री ने ऊना में युवक के अपहरण और हत्या के मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहां भी हत्या की घटनाएं हुई हैं, वहां पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है।
सदन में कानून-व्यवस्था की स्थिति को संतोषजनक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कटौती प्रस्ताव वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष ने विरोध जारी रखा। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव पर मतदान करवाया और सत्तापक्ष के समर्थन से कटौती प्रस्ताव गिर गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

