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हिमाचल बजट 2026 पर विधानसभा में चर्चा शुरू, जयराम ठाकुर ने उठाए सवाल, सीएम सुक्खु ने किया पलटवार

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हिमाचल बजट 2026 पर विधानसभा में चर्चा शुरू, जयराम ठाकुर ने उठाए सवाल, सीएम सुक्खु ने किया पलटवार


शिमला, 23 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट अनुमान पर सामान्य चर्चा सोमवार से शुरू हो गई। चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बजट पर कई सवाल उठाए, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार के फैसलों का बचाव करते हुए कहा कि नीतिगत निर्णयों के जरिए प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्हें लगातार 29 बजट देखने का अनुभव रहा है, जिनमें से पांच बजट उन्होंने खुद वित्त मंत्री के तौर पर पेश किए थे। उन्होंने कहा कि इस बार का बजट भाषण 4 घंटे 9 मिनट 33 सेकेंड तक चला, लेकिन इसके बावजूद इसमें ठोस विकास की दिशा स्पष्ट नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और वर्ष 2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाने की बात कर रहे हैं, जबकि बजट के प्रावधान इसके उलट दिखाई देते हैं। उनके अनुसार प्रदेश में विकास कार्यों की गति में गिरावट दर्ज की गई है।

इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार के नीतिगत फैसले प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार के समय केंद्र से पर्याप्त धन मिला था, जिसका उपयोग प्रदेश का कर्ज कम करने के लिए किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस विधायक भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि बजट को वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को कम करने का फैसला केंद्र स्तर पर लिया गया है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद प्रदेश सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए लगातार काम कर रही है। साथ ही उन्होंने मनरेगा योजना को लेकर केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

वहीं भाजपा विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दे उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा के बाद राहत राशि अभी तक पूरी तरह नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में पहले 970 परिवार बीपीएल सूची में शामिल थे, लेकिन हाल की छंटनी के बाद यह संख्या घटकर 119 रह गई है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके क्षेत्र में करीब एक दर्जन पेयजल योजनाएं बंद पड़ी हैं, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।

इंद्रदत्त लखनपाल ने बाबा बालक नाथ के लिए लंबे समय से प्रस्तावित रोपवे परियोजना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कई वर्षों से इसकी घोषणा हो रही है, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रस्तावित टोल टैक्स का भी विरोध करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों को नुकसान होगा।

बता दें कि विधानसभा में इस बार 54,928 करोड़ रुपये का बजट मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 21 मार्च को पेश किया था। इस बजट पर सामान्य चर्चा 23, 24 और 25 मार्च तक जारी रहेगी। इसके बाद 27, 28 और 30 मार्च को बजट की विभिन्न मांगों पर चर्चा और मतदान होगा। 30 मार्च को विनियोग विधेयक पारित किए जाने के साथ ही बजट प्रक्रिया पूरी होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा