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हिमाचल प्रदेश में 920 टीजीटी शिक्षक नियमित, शुरुआती मूल वेतन 38,100 रुपये तय

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हिमाचल प्रदेश में 920 टीजीटी शिक्षक नियमित, शुरुआती मूल वेतन 38,100 रुपये तय


शिमला, 21 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 920 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों (टीजीटी) को नियमित करने के आदेश जारी किए गए हैं। इनमें टीजीटी आर्ट्स, नॉन मेडिकल और मेडिकल श्रेणियों के शिक्षक शामिल हैं। निर्धारित नियमों और शर्तों को पूरा करने वाले उन अनुबंध शिक्षकों को नियमित किया गया है, जिन्होंने 30 सितंबर 2026 तक लगातार दो वर्ष का सेवाकाल पूरा कर लिया है। नियमितीकरण के आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। नियमित हुए शिक्षकों का शुरुआती मूल वेतन 38,100 रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त उन्हें नियमानुसार अन्य भत्ते भी मिलेंगे।

आरएंडपी नियमों के तहत हुआ नियमितीकरण

जारी कार्यालय आदेश के अनुसार इन शिक्षकों की नियुक्तियां स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध अनुबंध आधार पर भर्ती एवं पदोन्नति (आरएंडपी) नियमों के अनुसार की गई थीं। नियमितीकरण की प्रक्रिया में संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने शिक्षकों के सेवाकाल और अन्य आवश्यक शर्तों के संबंध में सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत की। इन रिपोर्टों का प्रारंभिक शिक्षा के उपनिदेशक स्तर पर भी सत्यापन किया गया। इसके बाद निदेशालय स्तर पर गठित स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर नियमितीकरण का निर्णय लिया गया।

लेवल-10 के तहत मिलेगा 38,100 रुपये मूल वेतन

नियमित किए गए टीजीटी शिक्षकों का वेतन हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित) वेतन नियम, 2022 के अनुसार तय होगा। उन्हें पे मैट्रिक्स के लेवल-10 के सेल-1 में निर्धारित न्यूनतम मूल वेतन 38,100 रुपये मिलेगा। इसके साथ समय-समय पर नियमानुसार देय अन्य भत्ते भी दिए जाएंगे।

आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन जरूरी

आदेश में शिक्षकों के लिए दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), स्वतंत्रता सेनानी के वार्ड (डब्ल्यूएफएफ), पूर्व सैनिकों के वार्ड (डब्ल्यूईएक्सएम), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) और प्राथमिकता वाले परिवारों (पीएचएच) जैसी श्रेणियों के तहत नियुक्त शिक्षकों को सक्षम प्राधिकारी से निर्धारित प्रारूप में जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होंगे। विवाहित महिलाओं के लिए पैतृक प्रमाणपत्र संबंधी प्रावधान भी आदेश में शामिल है।

संबंधित स्कूल या संस्थान के प्रमुख को इन प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड शिक्षकों की व्यक्तिगत फाइल में शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता के दस्तावेजों के साथ रखना होगा। प्रमाणपत्र जारी करने वाले प्राधिकारी से तीन महीने के भीतर उनका सत्यापन करवाना भी अनिवार्य होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा