हिमाचल में राजस्व लोक अदालतों से 6.81 लाख लंबित मामलों का निपटारा
शिमला, 05 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में लंबित राजस्व मामलों के निपटारे के लिए शुरू की गई राजस्व लोक अदालतों और विशेष राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से अब तक करीब 6.81 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इनमें 5.44 लाख से अधिक इंतकाल, 47,333 तकसीम और 63 हजार से अधिक निशानदेही के मामले शामिल हैं। इसके साथ ही राजस्व अभिलेखों में 26,288 दरूस्ती के काम भी किए गए हैं।
राज्य सरकार के अनुसार राजस्व लोक अदालतों की यह पहल लोगों के लिए भूमि से जुड़े मामलों के समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका लाभ मिला है। पहले भूमि संबंधी मामलों के लिए लोगों को कई बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता था। लोक अदालतों के आयोजन से ऐसे मामलों के निपटारे के लिए लोगों को स्थानीय स्तर पर एक तय मंच मिल रहा है।
लंबित राजस्व मामलों के जल्द समाधान के लिए अक्तूबर 2023 से हर महीने के अंतिम दो दिनों में तहसील और उप-तहसील मुख्यालयों पर राजस्व लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं। इसके बाद जनवरी 2026 से तकसीम और राजस्व दस्तावेजों में सुधार से जुड़े मामलों के लिए विशेष राजस्व लोक अदालतों की व्यवस्था शुरू की गई।
ये अदालतें हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को तीन दिन आयोजित की जा रही हैं।
सरकार के मुताबिक इन अदालतों के आयोजन से राजस्व मामलों की लंबित संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। इंतकाल, तकसीम और निशानदेही जैसे मामले सीधे जमीन के मालिकाना हक और भूमि के इस्तेमाल से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोक अदालतों के माध्यम से इनके निपटारे से लोगों को अपने मामलों के समाधान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।
राजस्व लोक अदालतों में राजस्व अभिलेखों में जरूरी सुधार भी किए जा रहे हैं। अब तक 26,288 दरूस्ती के मामले निपटाए गए हैं। इससे भूमि से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज जानकारी को सही करने का काम भी आगे बढ़ा है। सरकार का कहना है कि इससे राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।
राजस्व लोक अदालतों से सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को हो रहा है जिन्हें भूमि संबंधी मामलों के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से जिला या तहसील मुख्यालयों तक जाना पड़ता था। एक ही मामले के लिए कई बार कार्यालय जाने से लोगों को काम से छुट्टी लेने के साथ यात्रा पर भी खर्च करना पड़ता था। लोक अदालतों के जरिए मामलों के निपटारे से इस परेशानी में कमी आई है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार लोगों को पारदर्शी, जवाबदेह और उत्तरदायी प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामले परिवारों और भूमि मालिकों के हितों से सीधे जुड़े होते हैं। इन मामलों का समय पर समाधान सरकार की प्राथमिकता है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

