हिमाचल की 3,758 पंचायतों में लगेंगे ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, किसानों-बागवानों और छात्रों को मिलेगी मौसम की अपडेट
शिमला, 11 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मौसम की जानकारी अब केवल जिला, ब्लॉक या तहसील स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में प्रदेश की हर ग्राम पंचायत का अपना मौसम रिकॉर्ड होगा और गांव स्तर पर मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वेदर इन्फॉर्मेशन एंड नेटवर्क डाटा सिस्टम (WINDS) योजना के तहत हिमाचल प्रदेश की सभी 3,758 ग्राम पंचायतों में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
करीब 72 करोड़ रुपये की लागत से लागू होने वाली यह योजना प्रदेश के किसानों, बागवानों और स्कूली विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत और नई सुविधा लेकर आएगी।
योजना के तहत पंचायतों से जुड़े सरकारी स्कूलों में आधुनिक ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे। ये स्टेशन स्थानीय स्तर पर मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे और तापमान, वर्षा, हवा की गति, आर्द्रता, ओलावृष्टि समेत अन्य महत्वपूर्ण मौसम संबंधी आंकड़े रिकॉर्ड करेंगे।
इन आंकड़ों के आधार पर लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम की सटीक और ताजा जानकारी मिल सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में मौसम बहुत तेजी से बदलता है और कई बार एक ही जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की स्थिति अलग होती है। ऐसे में पंचायत स्तर पर मौसम का डेटा उपलब्ध होने से मौसम पूर्वानुमान पहले की तुलना में अधिक सटीक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हो सकेगा। इससे किसानों और बागवानों को समय रहते मौसम में आने वाले बदलावों की जानकारी मिलेगी और वे अपनी फसलों तथा बागवानी को संभावित नुकसान से बचाने के लिए उचित कदम उठा सकेंगे।
दरअसल, प्रदेश में सेब, कीवी, चेरी और अन्य फलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। ओलावृष्टि, तेज हवाओं या असामयिक वर्षा से होने वाले नुकसान की आशंका को देखते हुए यह योजना बागवानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसम संबंधी आंकड़े खेती और बागवानी को अधिक वैज्ञानिक और सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे।
योजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा से जुड़ा हुआ है। वेदर स्टेशन स्कूल परिसरों में स्थापित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को मौसम विज्ञान और पर्यावरण से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी प्राप्त होगी। छात्र आधुनिक तकनीक के माध्यम से मौसम की निगरानी और डेटा संग्रहण की प्रक्रिया को करीब से समझ सकेंगे। इससे विज्ञान और पर्यावरण शिक्षा को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार प्रदेश में इन वेदर स्टेशनों की स्थापना के लिए गुजरात और कानपुर की अलग-अलग कंपनियों को टेंडर आवंटित किए गए हैं। कंपनियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करना होगा।
योजना के तहत सभी पंचायतों में मार्च तक वेदर स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्य पूरा होने और व्यवस्था के सफल संचालन के बाद ही कंपनियों को केंद्र सरकार की ओर से भुगतान किया जाएगा।
प्रदेश सरकार के कृषि एवं बागवानी विभाग के सचिव सी. पाल रासु ने कहा है कि राज्य की सभी पंचायतों में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इससे प्रदेश के किसानों, बागवानों और स्कूली बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा तथा लोगों को अपने क्षेत्र की मौसम संबंधी सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
उनका कहना है कि यह व्यवस्था भविष्य में कृषि और बागवानी क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित होगी और मौसम आधारित निर्णय लेने में लोगों की मदद करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

