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हिमाचल में हवाई संपर्क मजबूत करने के लिए त्रिपक्षीय समझौता

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शिमला, 22 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क और विमानन अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार, भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के बीच मंगलवार को नई दिल्ली में त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता संशोधित क्षेत्रीय संपर्क योजना-उड़ान के तहत किया गया है। पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव संदीप कुमार ने बताया कि एमओयू पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और केंद्रीय नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

उन्होंने बताया कि समझौते के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में मौजूदा और नई उड़ान सेवाओं के साथ-साथ पात्र विमानन अवसंरचना के विकास एवं संचालन के लिए सहयोग का व्यापक ढांचा तैयार किया गया है। यह समझौता 10 वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा।

संदीप कुमार के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्य सरकार द्वारा 20 प्रतिशत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) का योगदान किया जाएगा, जबकि शेष 80 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार वहन करेगी।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों और हवाई सेवाओं के संचालन में आने वाली अधिक लागत को देखते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री से प्रदेश के लिए संशोधित 90:10 के वीजीएफ योगदान अनुपात को लागू करने का आग्रह किया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हवाई सेवाओं के लिए 90 प्रतिशत वित्तीय सहायता केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश के पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में हवाई संपर्क को बढ़ावा देने और विमानन अवसंरचना को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला