हिमाचल में मानसून की बारिश 11 फीसदी कम, अब तक 1683 करोड़ की तबाही और 300 मौतें
शिमला, 13 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में इस बार अब तक मानसून सामान्य से कम बरसा है, लेकिन बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं की मार बेहद भारी रही है। 30 जून को राज्य में पहुंचा मानसून अब तक करीब 1,683 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा चुका है और 300 लोगों की जान ले चुका है। एक जून से 13 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है। पिछले साल मानसून के दौरान सामान्य से 39 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई थी। मानसून अब अंतिम पड़ाव है और सितंबर के आखिरी सप्ताह में इसके राज्य से लौटने की संभावना रहती है। मौसम विभाग ने 19 सितंबर तक भारी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। ऐसे में सीजन समाप्त होने तक सामान्य बारिश की कमी और बढ़ सकती है।
सितंबर में भी बारिश का जोर टूटा, 17 फीसदी कमी
सितंबर के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश के बाद प्रदेश में बादल लगभग शांत हो गए। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक से 13 सितंबर तक राज्य में सामान्य से 17 फीसदी कम बारिश हुई है। इस दौरान बिलासपुर में सामान्य से 58 फीसदी अधिक बारिश हुई, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा है। कांगड़ा, किन्नौर, मंडी, शिमला और सिरमौर में भी सामान्य से अधिक बारिश हुई है। शिमला में सामान्य से 26 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर लाहौल-स्पीति में सामान्य से 99 फीसदी कम बारिश हुई। चंबा, हमीरपुर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, सोलन और ऊना में सितंबर की बारिश सामान्य से कम रही है।
पांच जिलों में ज्यादा, सात में कम बारिश
पूरे मानसून सीजन के आंकड़ों में बारिश का असमान वितरण सामने आया है। एक जून से 13 सितंबर तक बिलासपुर में सामान्य से 7 फीसदी, किन्नौर में 1 फीसदी, कुल्लू में 6 फीसदी, शिमला में 14 फीसदी और सिरमौर में 5 फीसदी अधिक बारिश हुई है। वहीं चंबा में सामान्य से 7 फीसदी, हमीरपुर में 33 फीसदी, कांगड़ा में 4 फीसदी, लाहौल-स्पीति में 63 फीसदी, मंडी में 18 फीसदी, सोलन में 16 फीसदी और ऊना में 5 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। राज्य के कुल आंकड़े में सामान्य से 11 फीसदी की कमी है। अगले छह दिनों में भारी बारिश की संभावना नहीं होने से मानसून की विदाई तक यह अंतर और बढ़ सकता है।
भूस्खलन से 71 सड़कें बंद, मंडी में सबसे ज्यादा असर
प्रदेश में बारिश की रफ्तार कम होने के बावजूद भूस्खलन का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा है। रविवार सुबह राज्य में 101 सड़कें बंद थीं, इनमें से 30 को बहाल कर लिया गया और शाम तक 71 सड़कें बंद रहीं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार मंडी में सबसे ज्यादा 32 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 19 और कांगड़ा में 10 सड़कें अवरुद्ध हैं। शिमला, सिरमौर और ऊना में तीन-तीन तथा लाहौल-स्पीति में एक सड़क बंद है। सुबह 84 बिजली ट्रांसफार्मर और 24 पेयजल योजनाएं प्रभावित थीं। शाम तक आठ ट्रांसफार्मर और 24 पेयजल योजनाएं बंद रहीं। शिमला में पांच और कुल्लू में तीन ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं। ठियोग उपमंडल में 24 पेयजल योजनाएं बंद हैं। रविवार को प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में मौसम साफ रहा और धूप खिली रही। शिमला और हमीरपुर में बारिश हुई। अगले 24 घंटों में अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश, 15 से 17 सितंबर के बीच कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और 18 व 19 सितंबर को कुछ स्थानों पर मौसम साफ तथा कुछ जगह बारिश होने का अनुमान है। 14 से 19 सितंबर तक भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।
धर्मशाला में 20.1 मिलीमीटर बारिश, पीडब्ल्यूडी को 1231 करोड़ का नुकसान
बीते 24 घंटों में धर्मशाला में 20.1 मिलीमीटर, ऊना में 15.1, कल्पा में 7.4, कसौली में 7, सराहन में 5.1, शिमला मौसम कार्यालय में 4.6 और एएमएस शिमला में 4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कुफरी में गरज के साथ बिजली चमकी, जबकि हमीरपुर के नेरी में 24 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार 30 जून से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में करीब 1,683 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लोक निर्माण विभाग को सबसे ज्यादा 1,231 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। इस दौरान 300 लोगों की मौत हुई, 521 लोग घायल और चार लापता हुए। 129 घर, 17 दुकानें और 470 पशुशालाएं पूरी तरह ढह गईं, जबकि 502 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा। मृतकों में 180 की मौत सड़क हादसों में और 120 की मौत फ्लैश फ्लड, भूस्खलन, फिसलने, बहने तथा अन्य कारणों से हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

